बीएचयू की शोध छात्रा श्वेता मिलान टोक्यो, जापान में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत करेंगी शोध

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बीएचयू की शोध छात्रा श्वेता मिलान टोक्यो, जापान में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत करेंगी शोध


वाराणसी, 13 अप्रैल (हि.स.)। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के प्रबंध अध्ययन संस्थान की शोध छात्रा श्वेता मिलान ने शैक्षणिक क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। उनके शोध-पत्र को एशियन कॉन्फ्रेंस ऑन द सोशल साइंसेज़ 2026 में को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुति के लिए स्वीकृति मिली है। यह सम्मेलन द इंटरनेशनल एकेडमिक फोरम द्वारा ओसाका स्कूल ऑफ इंटरनेशनल पब्लिक पॉलिसी के सहयोग से 9-13 मई 2026 तक टोक्यो इंटरनेशनल फोरम, जापान में आयोजित किया जाएगा।

यह जानकारी सोमवार को बीएचयू के जनसम्पर्क कार्यालय ने दी। बताया गया कि श्वेता मिलान, संस्थान में प्रो. अमित गौतम के मार्गदर्शन में शोध कार्य कर रही हैं। उनके सह-लेखन में तैयार शोध-पत्र “सीमाओं से परे विकास: भारत की जैविक खाद्य निर्यातक कंपनियों के लिए एक सतत निर्यात मार्ग” भारतीय ऑर्गेनिक निर्यात क्षेत्र की संभावनाओं और चुनौतियों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

—शोध के प्रमुख बिंदु

इस अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि भारतीय जैविक उत्पाद—जैसे बासमती चावल, मसाले, दालें, चाय, कॉफी और हर्बल उत्पाद—वैश्विक बाजार में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। शोध के अनुसार, निर्यात प्रोत्साहन (सरकारी सहायता, नीतिगत समर्थन और बाजार अवसर) निर्यात प्रदर्शन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह शोध कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) और राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम के अंतर्गत पंजीकृत 60 ऑर्गेनिक निर्यातक फर्मों के आंकड़ों पर आधारित है।

—वैश्विक परिदृश्य और भारत की स्थिति

शोध अध्ययन में बताया गया है कि अमेरिका, जर्मनी, नीदरलैंड, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे देश ऑर्गेनिक उत्पादों के प्रमुख आयातक हैं, जहां उपभोक्ता स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं। विश्व स्तर पर लगभग 45 लाख जैविक उत्पादक हैं, जिनमें से 61फीसद एशिया में स्थित हैं। भारत विश्व का सबसे बड़ा जैविक उत्पादक है और जैविक खेती के क्षेत्रफल में ऑस्ट्रेलिया के बाद दूसरे स्थान पर है। वर्ष 2024–25 में भारत ने लगभग 3.68 लाख मीट्रिक टन जैविक उत्पादों का निर्यात किया, जिसका मूल्य 665.97 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। वर्ष 2030 तक 2 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य इस क्षेत्र की अपार संभावनाओं को दर्शाता है।

—किसानों और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

शोध में यह भी रेखांकित किया गया है कि जैविक खेती को बढ़ावा देकर किसानों की आय में वृद्धि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न किए जा सकते हैं। यदि किसानों को बेहतर बाजार, प्रशिक्षण और निर्यात से जुड़ी जानकारी मिले, तो वे तेजी से ऑर्गेनिक खेती की ओर बढ़ सकते हैं। राज्य स्तर पर कर्नाटक, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैविक प्रसंस्करण इकाइयों में अग्रणी हैं। सिक्किम देश का पहला पूर्णतः जैविक राज्य है, जबकि मध्य प्रदेश सर्वाधिक प्रमाणित जैविक क्षेत्र वाला राज्य है।

—नीतिगत सुझाव और भविष्य की दिशा

शोध में सुझाव दिया गया है कि ऑर्गेनिक निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार को विशेष योजनाएं लागू करनी चाहिए। इसमें निर्यात सब्सिडी योजना,कम ब्याज दर पर ऋण,क्लस्टर आधारित ऑर्गेनिक एक्सपोर्ट ज़ोन, डिजिटल एक्सपोर्ट प्लेटफॉर्म है। साथ ही, एक समर्पित “ऑर्गेनिक एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल” की स्थापना की आवश्यकता भी बताई गई है, जो निर्यातकों को लक्षित सहायता प्रदान कर सके। यह शोध सतत विकास लक्ष्य 12 (जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन ) के अनुरूप है और “विकसित भारत 2047” के को आगे बढ़ाने के लिए सहायक है।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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