बीएचयू को बनना चाहिए पूर्वी उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास का इंजन : प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी
‘एग्री स्टार्टअप कॉन्क्लेव 2026’ की शुरुआत,कृषि नवाचार और उद्यमिता पर मंथन
वाराणसी, 28 मार्च (हि.स.)। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के कृषि विज्ञान संस्थान में शनिवार से दो दिवसीय “एग्री स्टार्टअप कॉन्क्लेव 2026” की शुरूआत हुई। “इनोवेटिंग एग्रीकल्चर फॉर सस्टेनेबल एंड एंटरप्रेन्योरियल फ्यूचर” थीम पर आधारित इस राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन में देश भर से वैज्ञानिक, स्टार्टअप्स, किसान, नीति निर्माता एवं उद्योग विशेषज्ञ भागीदारी कर रहे है।
उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता करते हुए बीएचयू कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि ऐसे आयोजन केवल भाषण के लिए नहीं, बल्कि संवाद, समस्याओं की समझ और समाधान खोजने में मददगार साबित होते है।
उन्होंने विश्वविद्यालय की भूमिका का खासतौर पर उल्लेख कर कहा कि बीएचयू का दायित्व केवल शिक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि समाज विशेषकर पूर्वी उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास में सक्रिय योगदान देना भी है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विकास के बावजूद आर्थिक प्रगति की चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए तकनीक के साथ प्रभावी बिजनेस मॉडल विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही, उन्होंने कृषि के साथ पशुपालन को महत्व देने, स्टार्टअप्स एवं इन्क्यूबेशन केंद्रों को जोड़ने तथा किसानों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की बात कही।
सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि सलाहकार, मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश अवनीश के. अवस्थी ने कहा कि राज्य को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने में कृषि क्षेत्र की केंद्रीय भूमिका है। उन्होंने बताया कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के 28 जनपदों में विश्व बैंक परियोजना के तहत कृषि उत्पादकता बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने स्टार्टअप्स की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन, रोबोटिक्स जैसी तकनीकों के माध्यम से कृषि को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है तथा किसानों को प्रशिक्षित किया जा सकता है।
आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा कि यह पहल बीएचयू, आईआईटी (बीएचयू) और अन्य संस्थानों के संयुक्त प्रयास से पूर्वी उत्तर प्रदेश के विकास के लिए की जा रही है। उन्होंने कृषि में नवाचार एवं वैल्यू एडिशन की अपार संभावनाओं पर बल देते हुए कहा कि तकनीक एवं वैज्ञानिक ज्ञान को सही तरीके से किसानों तक पहुँचाना आवश्यक है। कॉन्क्लेव में विभिन्न विशेषज्ञ वक्ताओं ने अपने विचार प्रस्तुत किए। डॉ. विकास कुमार सिंह ने ड्रोन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स एवं नई तकनीकों के माध्यम से कृषि उत्पादकता बढ़ाने तथा स्टार्टअप्स की भूमिका कि चर्चा की। राकेश कुमार, वाइस प्रेसिडेंट, देहात (एग्रिटेक स्टर्टअप कम्पनी) ने कृषि स्टार्टअप मॉडल, किसानों के साथ तकनीकी जुड़ाव एवं नवाचार आधारित सेवाओं के महत्व को रेखांकित किया।
मिलिंद राज — ड्रोन मैन ऑफ इंडिया, संस्थापक, रोबोज़ .इन ने ड्रोन एवं रोबोटिक्स के उपयोग तथा युवाओं के लिए कृषि-तकनीक में करियर संभावनाओं पर जोर दिया। निदेशक, कृषि विज्ञान संस्थान प्रो. यू.पी. सिंह ने बीएचयू की शैक्षणिक उपलब्धियों तथा कृषि तकनीकों के प्रसार के माध्यम से किसानों की उत्पादकता और आय वृद्धि में संस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। प्रो. वी.के. चंदोला, वरिष्ठ प्रोफेसर, कृषि अभियांत्रिकी विभाग, कृषि विज्ञान संस्थान ने कहा कि कृषि क्षेत्र में नवाचार, उद्यमिता और तकनीकी समन्वय को बढ़ावा देने के लिए इस प्रकार के आयोजन अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने आईआईटी (बीएचयू) एवं बीएचयू के सहयोग से प्रस्तावित एग्री-बिजनेस पार्क की अवधारणा को “लाइटहाउस” बताते हुए कहा कि यह किसानों को प्रशिक्षण, प्रोसेसिंग, मार्केटिंग और नवाचार के माध्यम से नई दिशा प्रदान करेगा।
प्रो. वीरेंद्र कमलवंशी, विभागाध्यक्ष, कृषि अर्थशास्त्र विभाग, कृषि विज्ञान संस्थान, ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

