वैकल्पिक प्रोटीन के क्षेत्र में बीएचयू के साथ मिलकर वैज्ञानिकों ने किया महत्वपूर्ण शोध

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वैकल्पिक प्रोटीन के क्षेत्र में बीएचयू के साथ मिलकर वैज्ञानिकों ने किया महत्वपूर्ण शोध


- वैकल्पिक प्रोटीन स्रोत पोषण संबंधी कमियों को दूर करने के साथ खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ खाद्य प्रणालियों में निभा सकते हैं अहम भूमिका

वाराणसी,29 सितंबर (हि.स.)। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की एक शोध टीम ने वरिष्ठ प्रोफेसर एवं बीआर अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर के कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय के नेतृत्व में वैकल्पिक प्रोटीन स्रोतों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण शोध उपलब्धि हासिल की है। शोध दल का समीक्षा लेख प्रतिष्ठित जर्नल ऑफ फूड बायोकेमिस्ट्री में “एक्सप्लोरिंग अल्टरनेटिव प्रोटीन सोर्सेज टुवॉर्ड सस्टेनेबल एंड फ्यूचर न्यूट्रिशन” शीर्षक से प्रकाशित हुआ है। यह शोध भारत और ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों के बीच अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सहयोग का उल्लेखनीय उदाहरण है।

शोध लेख जर्नल के विशेषांक “वुमन इन फूड साइंस स्पेशल कलेक्शन सी: एडवांसिंग प्रोटीन बेस्ड फूड्स: नॉवेल सोर्सेज, एन्हांस्ड फंक्शनैलिटी एंड सस्टेनेबल सॉल्यूशंस” का हिस्सा है। शोध दल में बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान के डेयरी साइंस एंड फूड टेक्नोलॉजी विभाग से उर्वशी विक्रांता, अंकिता हुड्डा और अभिषेक दत्त त्रिपाठी, बीएचयू एवं बीआरए बिहार विश्वविद्यालय से प्रो. दिनेश चंद्र राय, ऑस्ट्रेलिया के डीकिन विश्वविद्यालय स्थित सीएएसएस फूड रिसर्च सेंटर, स्कूल ऑफ एक्सरसाइज एंड न्यूट्रिशन साइंस से दीपेंद्र कुमार महतो, लखनऊ विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग से प्रदीप कुमार तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी इरविन कॉलेज से अपर्णा अग्रवाल शामिल हैं।

शोध के संबंध में प्रो. दिनेश चंद्र राय ने मंगलवार को बताया कि समीक्षा में पारंपरिक पशु-आधारित प्रोटीन के व्यावहारिक विकल्पों के रूप में प्लांट-बेस्ड, सेल-बेस्ड, कल्चर-बेस्ड और कीट-आधारित प्रोटीन स्रोतों का व्यापक विश्लेषण किया गया है। अध्ययन में बढ़ती वैश्विक आबादी, जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के बीच उच्च गुणवत्ता वाले, किफायती और टिकाऊ प्रोटीन स्रोतों की बढ़ती आवश्यकता को बताया गया है।

उन्होंने कहा कि वैकल्पिक प्रोटीन स्रोत उन क्षेत्रों में पोषण संबंधी कमियों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, जहां पारंपरिक प्रोटीन स्रोतों की उपलब्धता सीमित है। हालांकि, इसके लिए विश्वसनीय उत्पादन प्रणालियों, प्रभावी नियामक व्यवस्था और पारदर्शी विनिर्माण मानकों का होना आवश्यक है। उपभोक्ताओं के बीच इन प्रोटीन स्रोतों की सुरक्षा, पोषण गुणवत्ता और नियमित उपयोग की उपयुक्तता को लेकर विश्वास कायम करना भी महत्वपूर्ण है।

प्रो. राय ने कहा कि इस शोध का उद्देश्य ऐसे आहार विकल्पों के विकास और विस्तार को प्रोत्साहित करना है, जो मानव स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ खाद्य प्रणालियों को दीर्घकालिक रूप से अधिक टिकाऊ और सक्षम बना सकें।

उन्होंने उम्मीद जताई कि यह समीक्षा वैकल्पिक प्रोटीन के क्षेत्र में भविष्य के वैज्ञानिक अनुसंधान, उद्योग जगत की भागीदारी और नीति निर्माण के लिए उपयोगी आधार प्रदान करेगी।------------

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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