बीएचयू की बड़ी उपलब्धि : एक साल में एक साहीवाल गाय से पैदा हुईं पांच स्वस्थ बछियां

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बीएचयू की बड़ी उपलब्धि : एक साल में एक साहीवाल गाय से पैदा हुईं पांच स्वस्थ बछियां


——राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत भ्रूण प्रत्यारोपण परियोजना को मिली सफलता, देशी गोवंश के संरक्षण और नस्ल सुधार को मिलेगा बढ़ावा

—सेक्स-सॉर्टेड सीमेन और एमओईटी तकनीक से संभव हुआ श्रेष्ठ नस्ल की संतति

वाराणसी, 09 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में वाराणसी स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के राजीव गांधी दक्षिणी परिसर, बरकछा स्थित पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय ने पशुओं के प्रजनन और नस्ल सुधार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान ने मल्टीपल ओव्यूलेशन एंड एम्ब्रियो ट्रांसफर (एमओईटी) तकनीक के माध्यम से एक वर्ष के भीतर एक ही साहीवाल गाय से पांच स्वस्थ बछियों का उत्पादन किया है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत संचालित एम्ब्रियो ट्रांसफर परियोजना की यह सफलता देशी गोवंश की श्रेष्ठ आनुवंशिक क्षमता के तेजी से प्रसार की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। शुक्रवार को यह जानकारी बीएचयू जनसम्पर्क कार्यालय ने दी।

——11.5 किलोग्राम प्रतिदिन दूध देने वाली गाय को बनाया भ्रूण दाता

जनसम्पर्क कार्यालय के अनुसार, इस परियोजना के लिए शुद्ध नस्ल की साहीवाल गाय संख्या 53 का चयन भ्रूण दाता के रूप में किया गया। इस गाय का अधिकतम दैनिक दुग्ध उत्पादन 11.5 किलोग्राम रहा है। गाय में कृत्रिम गर्भाधान के लिए ऐसे साहीवाल सांड के सेक्स-सॉर्टेड सीमेन का उपयोग किया गया, जिसकी माता का मानक दुग्ध उत्पादन लगभग 4,800 किलोग्राम रहा है।

प्रजनन प्रक्रिया के दौरान दाता गाय से कुल 15 प्रत्यारोपण योग्य भ्रूण प्राप्त किए गए। इन भ्रूणों को अलग-अलग सरोगेट गायों में प्रत्यारोपित किया गया। इनमें से पांच गायें गर्भवती हुईं और निर्धारित अवधि के बाद पांच स्वस्थ साहीवाल बछियों ने जन्म लिया। संस्थान के अनुसार, सभी पांच बछियां वर्तमान में स्वस्थ हैं।

—एमओईटी तकनीक से वर्षों का काम कम समय में संभव

पारंपरिक प्रजनन पद्धति में एक गाय से पांच बछियां प्राप्त करने के लिए कई क्रमिक गर्भधारण की आवश्यकता पड़ सकती है। इसमें लगभग छह से साढ़े छह वर्ष तक का समय लग सकता है। इसके विपरीत, एमओईटी तकनीक के माध्यम से एक श्रेष्ठ गाय से एक साथ कई भ्रूण प्राप्त कर उन्हें अलग-अलग सरोगेट गायों में प्रत्यारोपित किया जा सकता है। इससे कम समय में अधिक संतति प्राप्त करने और मूल्यवान आनुवंशिक गुणों को तेजी से अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलती है।

इस तकनीक की खासियत यह है कि जन्म लेने वाली बछियां आनुवंशिक रूप से भ्रूण दाता गाय और भ्रूण निर्माण में प्रयुक्त सांड की संतति होती हैं। सरोगेट गाय की भूमिका केवल गर्भधारण और गर्भस्थ शिशु के विकास तक सीमित रहती है। इस प्रकार श्रेष्ठ नस्ल की गाय को बार-बार गर्भधारण कराए बिना उसकी आनुवंशिक क्षमता का व्यापक प्रसार किया जा सकता है।

——सेक्स-सॉर्टेड सीमेन से पांचों संततियां मादा

इस परियोजना में सेक्स-सॉर्टेड सीमेन के इस्तेमाल से मादा संतति प्राप्त करने की संभावना बढ़ाने में मदद मिली। इसके परिणामस्वरूप पांचों नवजात बछियां मादा हैं। भविष्य में ये बछियां बेहतर दुग्ध उत्पादन और श्रेष्ठ आनुवंशिक गुणों के प्रसार के लिए महत्वपूर्ण डेयरी संसाधन साबित हो सकती हैं। इससे देशी नस्लों के संरक्षण, डेयरी उत्पादन क्षमता में सुधार और उन्नत पशुधन तैयार करने के प्रयासों को बल मिलने की उम्मीद है।

—डॉ. मनीष कुमार के निर्देशन में संचालित है परियोजना

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत संचालित इस परियोजना का क्रियान्वयन प्रधान अन्वेषक डॉ. मनीष कुमार के निर्देशन में किया जा रहा है। इसमें सह-प्रधान अन्वेषक डॉ. कौस्तुभ किशोर सारफ और डॉ. अजीत सिंह का भी महत्वपूर्ण योगदान है।

इस उपलब्धि पर कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. वी. के. मिश्रा, पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. (डॉ.) अमित राज गुप्ता तथा राजीव गांधी दक्षिणी परिसर के प्रभारी अधिकारी प्रो. बी. एम. एन. कुमार ने परियोजना दल के प्रयासों की सराहना की।

—अब ओवम पिक-अप और इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन तकनीक पर जोर

परियोजना के अगले चरण में पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय की टीम ओवम पिक-अप, इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन और एम्ब्रियो ट्रांसफर (ओपीयू-आईवीएफ-ईटी) जैसी उन्नत प्रजनन तकनीकों को अपनाने की योजना बना रही है। इस प्रक्रिया में मादा पशु से अंडाणु एकत्र कर प्रयोगशाला में उनका निषेचन कराया जाता है और विकसित भ्रूण को सरोगेट पशु में प्रत्यारोपित किया जाता है। इस तकनीक को विशेष रूप से विंध्य क्षेत्र के पशुपालकों तक पहुंचाने का प्रस्ताव है। इसके माध्यम से साहीवाल और गंगातीरी सहित अन्य देशी गोवंशीय नस्लों के आनुवंशिक उन्नयन को प्रोत्साहित करने, बेहतर पशुधन विकसित करने और पशुपालकों को उन्नत प्रजनन तकनीकों से जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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