बीएचयू के प्रो. श्याम सुंदर पद्मश्री से सम्मानित, बधाई देने की होड़

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बीएचयू के प्रो. श्याम सुंदर पद्मश्री से सम्मानित, बधाई देने की होड़


—प्रो. सुंदर वर्ष 2013 से काला-अजार एवं लीशमैनियासिस अनुसंधान के क्षेत्र में विश्व के शीर्ष वैज्ञानिकों में रहे

वाराणसी, 25 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में मेडिसिन विभाग के विशिष्ट (मानद) प्रोफेसर प्रो. श्याम सुंदर को चिकित्सा एवं वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए सोमवार को पद्मश्री पुरस्कार दिया गया है। यह सम्मान विशेष रूप से काला-अजार (विसरल लीशमैनियासिस) जैसी उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारी के निदान, उपचार और उन्मूलन में उनके दशकों लंबे योगदान के लिए मिला है।

30 नवंबर 1953 को जन्मे प्रो. श्याम सुंदर ने बीएचयू से एमबीबीएस एवं एमडी (मेडिसिन) की शिक्षा प्राप्त की और बाद में मेडिसिन विभाग में संकाय सदस्य के रूप में जुड़े। बिहार के मुजफ्फरपुर में पले-बढ़े प्रो. सुंदर ने बचपन से ही काला-अजार से पीड़ित मरीजों की पीड़ा को करीब से देखा, जिसने उन्हें इस रोग के खिलाफ आजीवन संघर्ष के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने वर्ष 1993 में मुजफ्फरपुर में “काला-अजार मेडिकल रिसर्च सेंटर” की स्थापना की, जहां जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क जांच, उपचार, भोजन और यात्रा सहायता उपलब्ध कराई जाती है। यह केंद्र आज काला-अजार अनुसंधान का एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित संस्थान बन चुका है।

प्रो. सुंदर ने आरके-39 रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट के नैदानिक मूल्यांकन और वैश्विक स्वीकृति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे दूरदराज क्षेत्रों में केवल एक बूंद रक्त से काला-अजार की शीघ्र और सस्ती पहचान संभव हो सकी। इसके अलावा उन्होंने मिल्टेफोसिन को काला-अजार के लिए पहली प्रभावी मौखिक दवा के रूप में स्थापित करने वाले महत्वपूर्ण क्लीनिकल परीक्षणों का नेतृत्व किया। उनके नेतृत्व में हुए शोध ने लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन-बी (एंबिसोम) की एकल खुराक को काला-अजार के सुरक्षित एवं प्रभावी उपचार के रूप में स्थापित किया। वर्ष 2010 में न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित इस शोध ने वैश्विक स्तर पर उपचार की दिशा बदल दी। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसे प्रथम पंक्ति के उपचार के रूप में अनुशंसित किया।

प्रो. सुंदर वर्ष 2013 से काला-अजार एवं लीशमैनियासिस अनुसंधान के क्षेत्र में विश्व के शीर्ष वैज्ञानिकों में शामिल रहे हैं। उनके शोध द लैंसेट सहित अनेक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। उन्हें पूर्व में राष्ट्रपति द्वारा विजिटर्स अवार्ड, आईसीएमआर का डॉ. अंबेडकर पुरस्कार, कमला मेनन पुरस्कार, पी.एन. राजू पुरस्कार, रैनबैक्सी रिसर्च फाउंडेशन अवार्ड तथा एनी माउरर-डी-केनी फाउंडेशन अवार्ड सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। प्रो. श्याम सुंदर को पद्मश्री सम्मान मिलने पर बीएचयू, चिकित्सा जगत और पूर्वांचल क्षेत्र में हर्ष का माहौल है।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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