पर्यटन में प्रौद्योगिकी के अधिक एकीकरण, एआई के जिम्मेदार उपयोग और भारत की सांस्कृतिक विविधता पर जोर
वाराणसी, 27 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के पर्यटन एवं आतिथ्य अध्ययन केंद्र की ओर से विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में पर्यटन क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के अधिक एकीकरण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जिम्मेदार उपयोग और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण पर जोर दिया गया।
वक्ताओं ने कहा कि तकनीक के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विरासत को नए और सुगम तरीकों से दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जा सकता है, लेकिन एआई से उत्पन्न भ्रामक सूचनाओं और गलत ऐतिहासिक आख्यानों के प्रति सतर्क रहना भी जरूरी है।
समारोह की शुरुआत 25 सितंबर को हेरिटेज वॉक से हुई थी। इसका समापन कला संकाय के मुंशी प्रेमचंद सभागार में आयोजित कार्यक्रम के साथ हुआ। इस दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ ‘कल्चरल वॉक’ का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने देश के विभिन्न राज्यों की पारंपरिक वेशभूषा और परिधानों का प्रदर्शन किया।
समारोह की इस वर्ष की थीम ‘डिजिटल एजेंडा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से पर्यटन की पुनर्रचना’ रही। कार्यक्रम में वक्ताओं ने पर्यटन के बदलते स्वरूप और तकनीकी विकास के प्रभावों पर विचार व्यक्त किए।
पर्यटन एवं आतिथ्य अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रो. शायजू पी. जे. ने कहा कि यह समारोह केंद्र के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि हाल ही में स्थापित केंद्र के तत्वावधान में यह पहला विश्व पर्यटन दिवस समारोह है। उन्होंने पर्यटन शिक्षा और शोध को बदलती तकनीकी जरूरतों के अनुरूप विकसित करने पर जोर दिया।
पर्यटन मंत्रालय के सहायक निदेशक अमित गुप्ता ने एआई और उभरती प्रौद्योगिकियों के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते तकनीकी परिदृश्य को समझने और उसे सही दिशा देने में अकादमिक जगत की महत्वपूर्ण भूमिका है। विद्यार्थी, शिक्षक और शैक्षणिक संस्थान अकादमिक तथा शोधपरक दृष्टिकोण के माध्यम से इस बदलाव में योगदान दे सकते हैं।
कला संकाय के कला इतिहास विभाग की अध्यक्ष प्रो. ज्योति रोहिल्ला राणा ने कहा कि पर्यटन एवं आतिथ्य अध्ययन केंद्र के विकास के लिए शिक्षकों और विद्यार्थियों की सामूहिक भागीदारी जरूरी है। उन्होंने केंद्र के एक अन्य विभाग का हिस्सा होने से स्वतंत्र पहचान हासिल करने तक के सफर का उल्लेख करते हुए इसके भविष्य में पूर्ण विकसित विभाग के रूप में स्थापित होने की उम्मीद जताई।
कार्यक्रम में रोटरी क्लब के अध्यक्ष डॉ. अजय दुबे, डिस्ट्रिक्ट चेयरमैन देवेश कुमार और विश्व पर्यटन दिवस समारोह के समन्वयक डॉ. अनिल कुमार सिंह ने भी विचार रखे।
—विरासत संरक्षण में एआई के अवसर और चुनौतियां
कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में एआई की संभावनाओं तथा चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि एआई की मदद से स्मारकों, मंदिरों, त्योहारों, परंपराओं और सांस्कृतिक प्रथाओं को नवीन एवं अधिक सुगम तरीकों से प्रस्तुत किया जा सकता है। हालांकि, एआई से तैयार होने वाली भ्रामक सूचनाओं, डीपफेक, परिवर्तित तस्वीरों और गलत ऐतिहासिक आख्यानों के जोखिम को लेकर भी सावधानी बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने पर्यटन के डिजिटल विस्तार के साथ सूचना की विश्वसनीयता और सांस्कृतिक प्रामाणिकता बनाए रखने को महत्वपूर्ण बताया।
——1999 से शुरू हुआ पर्यटन शिक्षा का सफर
धन्यवाद ज्ञापन के दौरान डॉ. प्रवीण सिंह राणा ने बीएचयू में पर्यटन शिक्षा के विकास की यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में पर्यटन से संबंधित पहला प्रमुख आयोजन 1999 में इतिहास विभाग की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय पर्यटन सम्मेलन था।
उन्होंने कहा कि उस पहल से लेकर पर्यटन एवं आतिथ्य अध्ययन केंद्र की वर्तमान गतिविधियों तक की यात्रा में कई महत्वपूर्ण पड़ाव आए हैं। उन्होंने बताया कि परास्नातक कार्यक्रम के 25 बैच अपनी शिक्षा पूरी कर चुके हैं, जो इस शैक्षणिक यात्रा का रजत जयंती पड़ाव है।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

