वाराणसी : स्लीप एपनिया के इलाज के लिए बीएचयू के वैज्ञानिकों ने विकसित किया खास उपकरण, मिला भारतीय पेटेंट

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वाराणसी : स्लीप एपनिया के इलाज के लिए बीएचयू के वैज्ञानिकों ने विकसित किया खास उपकरण, मिला भारतीय पेटेंट


वाराणसी : स्लीप एपनिया के इलाज के लिए बीएचयू के वैज्ञानिकों ने विकसित किया खास उपकरण, मिला भारतीय पेटेंट


—मैंडिबुलर एडवांसमेंट डिवाइस से बिना सर्जरी संभव होगा ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया का प्रबंधन

-डॉ. विपुल शर्मा, प्रो. टीपी चतुर्वेदी और प्रो. एचसी बरनवाल के संयुक्त प्रयास को मिली बड़ी सफलता

वाराणसी, 07 नवम्बर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के दंत चिकित्सा संकाय ने चिकित्सा एवं तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (ओएसए) के प्रबंधन के लिए विकसित एक अभिनव मैंडिबुलर एडवांसमेंट डिवाइस (एमएडी) को भारतीय पेटेंट अधिनियम के तहत पेटेंट प्रदान किया गया है। इस स्वदेशी उपकरण को बीएचयू के डॉ. विपुल शर्मा, प्रो. डॉ. टीपी चतुर्वेदी और प्रो. डॉ. एचसी बरनवाल ने विकसित किया है। यह उपलब्धि दंत चिकित्सा और निद्रा चिकित्सा के क्षेत्र में एक नई संभावना के रूप में देखी जा रही है।

जबड़े को आगे बढ़ाकर सांस लेने में करेगा मदद

डॉ. टीपी चतुर्वेदी और डॉ. विपुल शर्मा ने शनिवार को बताया कि डेंटल स्लीप मेडिसिन दंत चिकित्सा की एक उभरती हुई शाखा है। इसके माध्यम से जबड़ों की संरचनात्मक असामान्यताओं के कारण खर्राटे और सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों का उपचार किया जा सकता है।

पेटेंट प्राप्त यह उपकरण ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के गैर-शल्य चिकित्सा प्रबंधन की दिशा में एक अभिनव पहल है। इसमें नियंत्रित और समायोज्य तंत्र विकसित किया गया है, जो धीरे-धीरे निचले जबड़े (मैंडिबल) को आगे की ओर बढ़ाता है। इससे ऊपरी श्वसन मार्ग का विस्तार करने में मदद मिलती है और नींद के दौरान सांस के प्रवाह को सुगम बनाने में सहायता मिलती है। परिणामस्वरूप श्वसन मार्ग में बार-बार होने वाले अवरोध को कम करने और नींद की गुणवत्ता में सुधार लाने का उद्देश्य है।

मरीज की जरूरत के अनुसार किया जा सकेगा समायोजन

डॉ. विपुल शर्मा ने बताया कि यह उपकरण ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया से पीड़ित उपयुक्त मरीजों के लिए सुविधाजनक, मरीज-अनुकूल और गैर-इनवेसिव उपचार विकल्प प्रस्तुत करता है। इसकी समायोज्य संरचना के कारण प्रत्येक मरीज की शारीरिक बनावट और चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार निचले जबड़े की स्थिति को नियंत्रित तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है।

यह उपकरण विशेष रूप से उन मरीजों के लिए उपयोगी उपचार विकल्प बनने की क्षमता रखता है, जिन्हें नींद के दौरान सांस लेने में परेशानी होती है। हालांकि, इसका उपयोग विशेषज्ञ चिकित्सक की जांच और सलाह के बाद ही किया जाना चाहिए।

अंतर्विषयक शोध और स्वदेशी नवाचार को मिली पहचान

प्रो. डॉ. टीपी चतुर्वेदी ने कहा कि इस उपकरण को पेटेंट मिलना पूरी शोध टीम के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि है। यह अंतर्विषयक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और मरीजों की चिकित्सा एवं देखभाल को बेहतर बनाने वाले व्यावहारिक समाधानों के विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि एक गंभीर जनस्वास्थ्य समस्या के समाधान में स्वदेशी तकनीक और नवाचार की संभावनाओं को भी रेखांकित करती है। इससे दंत चिकित्सा और निद्रा चिकित्सा के बीच समन्वय को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

क्या है ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया?

ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (ओएसए) नींद से जुड़ा एक गंभीर श्वसन विकार है। इसमें सोते समय गले की मांसपेशियां शिथिल हो जाती हैं, जिससे ऊपरी श्वसन मार्ग बार-बार आंशिक या पूरी तरह अवरुद्ध हो जाता है। इसके कारण नींद के दौरान कुछ समय के लिए सांस रुक जाती है। शरीर में ऑक्सीजन का स्तर प्रभावित होने पर व्यक्ति अचानक हड़बड़ाकर सांस लेने लगता है। इस समस्या के कारण नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है और लंबे समय तक स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं भी हो सकती हैं।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:

रात में तेज और लगातार खर्राटे आना। सोते समय अचानक दम घुटना या सांस लेने में रुकावट महसूस होना। सुबह उठने पर सिरदर्द या मुंह सूखना। पर्याप्त नींद लेने के बावजूद दिनभर थकान और अत्यधिक नींद आना। चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी और कामकाज में परेशानी।

विशेषज्ञों के अनुसार, इन लक्षणों को सामान्य खर्राटे समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और उचित उपचार से इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

Livevns.news Desk
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