“लैब से जमीन तक” की पहल, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय और साईं इंस्टीट्यूट के बीच समझौता
वाराणसी, 23 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ग्रामीण क्षेत्रों में नवाचार, डिजिटल प्रौद्योगिकी, कौशल विकास, उद्यमिता तथा अनुसंधान एवं तकनीकी समाधानों को “लैब से ज़मीन तक” पहुँचाने के उद्देश्य से काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) एवं साईं इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
बुधवार शाम बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी की उपस्थिति में विश्वविद्यालय के केंद्रीय कार्यालय में कुलसचिव राजन श्रीवास्तव तथा साईं इंस्टीट्यूट के निदेशक अजय कुमार सिंह ने समझौता ज्ञापन का आदान प्रदान किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि “टेक्नोलॉजी और इनोवेशन की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब उनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय और साईं इंस्टीट्यूट का यह सहयोग रिसर्च और टेक्नोलॉजी को ‘लैब से जमीन तक’ ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण क़दम है।”
साईं इंस्टीट्यूट के चेयरमैन एवं आईटी बीएचयू के पूर्व निदेशक प्रो. एस. एन. उपाध्याय ने कहा कि “हमारा प्रयास है कि नई टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को ग्रामीण आवश्यकताओं से जोड़ा जाए, ताकि रिसर्च और ज्ञान का लाभ ग्रामीण समाज एवं आमजन तक पहुँच सके।”
निदेशक अजय कुमार सिंह ने “अनुसंधान, नवाचार और आईसीटी के माध्यम से ग्रामीण आबादी को लाभान्वित करने के संस्थान के लक्ष्य को रेखांकित किया।
समझौता ज्ञापन के माध्यम से अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास, नवाचार, कौशल विकास, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और उद्यमिता विकास को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त प्रयास किए जाएंगे। साथ ही किसानों एवं महिलाओं की आजीविका, डिजिटल समावेशन और ग्रामीण नवाचार को प्रोत्साहित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

