किसी भी कालखंड के आर्थिक और सांस्कृतिक इतिहास को समझने में मुद्राओं की भूमिका निर्णायक : प्रो. एम. पी. अहिरवार
—बीएचयू में सात दिवसीय राष्ट्रीय हैंड्स-ऑन कार्यशाला,पुरातात्त्विक एवं मुद्राशास्त्रीय धरोहर से चित्र प्रदर्शनी लगी
वाराणसी, 16 अप्रैल (हि.स.)। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.एम. पी. अहिरवार ने गुरूवार को कहा कि किसी भी कालखंड के आर्थिक और सांस्कृतिक इतिहास को समझने में मुद्राओं की भूमिका निर्णायक है। प्रो.अहिरवार विभाग के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय राष्ट्रीय हैंड्स-ऑन कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। “भारतीय ज्ञान परम्परा (आईकेएस) के परिप्रेक्ष्य में प्राचीन भारतीय मुद्राएँ: स्रोत, लिपि एवं टकसाल तकनीक” विषयक कार्यशाला में प्रो.अहिरवार ने भारतीय इतिहास के आर्थिक एवं सांस्कृतिक पुनर्निर्माण में मुद्राशास्त्र के महत्व को भी बताया।
उन्होंने बताया कि यह कार्यशाला महान इतिहासकार एवं मुद्राविद् स्वर्गीय प्रो. ए. के. नारायण की जन्मशती के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही है। जन्मशती वर्ष के अंतर्गत यह सातवाँ शैक्षणिक कार्यक्रम है।
कार्यशाला संयोजक प्रो. मीनाक्षी सिंह ने कार्यशाला के उद्देश्यों एवं रूपरेखा को बताया। इसमें अमितेश्वर झा (पूर्व निदेशक, आईआईआरएनएस नासिक ) ने भारत में मुद्राशास्त्र के विकास एवं प्रगति को बताया। उन्होंने वैज्ञानिक तकनीकों एवं अंतः विषयक दृष्टिकोण के बढ़ते उपयोग को रेखांकित किया। मनीष वर्मा ( क्यूरेटर, हिंदुजा फाउंडेशन ) ने हिंदुजा फाउंडेशन द्वारा 34,000 से अधिक सिक्कों के संग्रह के संरक्षण एवं संकलन कार्य की जानकारी दी।
भारतीय मुद्रा परिषद् के अध्यक्ष प्रो. पी. एन. सिंह ने भी ज्ञानवर्धक बातें बताई। बतौर मुख्य अतिथि प्रो. कमल शील (पूर्व रेक्टर, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) ने अपने पिता के एक मुद्राविद् के रूप में विद्वतापूर्ण जीवन-यात्रा का उल्लेख किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कला संकाय की अधिष्ठाता प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने की। दोपहर पश्चात कार्यशाला का द्वितीय सत्र आरंभ हुआ, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठतम मुद्राविद् प्रो. ओ. एन. सिंह ने की। इस सत्र में अमितेश्वर झा ने व्याख्यान प्रस्तुत कर प्रतिभागियों को मुद्राशास्त्र के विविध आयामों से अवगत कराया। यह कार्यशाला देश के विभिन्न भागों से आए प्रतिभागियों की सहभागिता के साथ 22 अप्रैल 2026 तक आयोजित की जाएगी, जिसमें व्याख्यान, व्यावहारिक सत्र एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्मिलित हैं। कार्यक्रम के आयोजन में हिंदुजा फाउंडेशन, भारत कला भवन, भारतीय मुद्रा परिषद् तथा उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग ने सहयोग दिया है। कार्यशाला में उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग ने आकर्षक प्रदर्शनी भी लगाई है। जिसमें पुरातात्त्विक एवं मुद्राशास्त्रीय धरोहर से संबंधित महत्वपूर्ण सामग्री एवं चित्रात्मक पैनलों का प्रदर्शन किया गया है।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

