आम और जामुन की गलियों से लेकर नीम और गुलमोहर की राहों तक,व्यापक वृक्ष गणना ने बीएचयू की बनाई विशिष्ट हरित पहचान

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आम और जामुन की गलियों से लेकर नीम और गुलमोहर की राहों तक,व्यापक वृक्ष गणना ने बीएचयू की बनाई विशिष्ट हरित पहचान


- परिसर में 50 समूहों एवं 158 प्रजातियों के कुल 50,225 वृक्ष है मौजूद

वाराणसी, 06 जून (हि.स.)। आम और जामुन की गलियों से लेकर नीम, गुलमोहर और पीपल की छांव तक फैला काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) का विशाल हरित परिसर अब वैज्ञानिक रूप से दर्ज और मानचित्रित हो चुका है। विश्वविद्यालय में कराई गई व्यापक वृक्ष गणना (ट्री सेन्सस) में परिसर में 50 समूहों एवं 158 प्रजातियों के कुल 50,225 वृक्षों की मौजूदगी दर्ज की गई है। यह पहल विश्वविद्यालय की हरित विरासत के संरक्षण, संवर्धन और वैज्ञानिक प्रलेखन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

यह जानकारी विश्वविद्यालय के जनसम्पर्क कार्यालय ने शनिवार को दी। बताया गया कि लगभग 1360 एकड़ में फैला बीएचयू परिसर देश के सबसे बड़े और समृद्ध संस्थागत हरित परिदृश्यों में शामिल है। विश्वविद्यालय की उद्यान विशेषज्ञ इकाई के तत्वावधान में मार्च से मई 2025 के बीच यह वृक्ष गणना अभियान संचालित किया गया। इसके निष्कर्षों को ‘ट्री ऑफ बीएचयू’ शीर्षक पुस्तक में संकलित किया गया है, जो परिसर की वृक्ष विविधता का विस्तृत वैज्ञानिक दस्तावेज प्रस्तुत करती है।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर विज्ञान संस्थान के महामना सभागार में आयोजित समारोह में कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने आईआईटी (बीएचयू) के निदेशक प्रो. अमित पात्रा की उपस्थिति में पुस्तक का लोकार्पण किया। इस अवसर पर कुलपति ने इसे विश्वविद्यालय की हरित संपदा के संरक्षण और दस्तावेजीकरण की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह मॉडल देश के अन्य शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है। उन्होंने इस विशाल कार्य की योजना एवं सफल क्रियान्वयन में योगदान देने वाली पूरी टीम को बधाई देते हुए उनके उत्कृष्ट सामूहिक प्रयासों की सराहना की।

इस पुस्तक में परिसर के सड़क किनारे लगे वृक्षों, फलदार, औषधीय, सजावटी, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय महत्व वाली प्रजातियों का विस्तृत विवरण दिया गया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता प्रत्येक वृक्ष का भू-संदर्भित (जियो-रेफरेंस्ड) जीआईएस आधारित मानचित्रण है। इसमें वृक्षों की संरक्षण स्थिति, पारिस्थितिकीय महत्व, आवासीय जानकारी, उपयोगिता और छायाचित्रों सहित व्यापक विवरण उपलब्ध कराया गया है।

आईआईटी (बीएचयू) के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने भी वृक्ष गणना में अपनाई गई वैज्ञानिक कार्यप्रणाली और आधुनिक तकनीकों के उपयोग की सराहना की।

उद्यान विशेषज्ञ इकाई के प्रभारी प्रो. सरफराज आलम ने बताया कि पूरे परिसर को 24 सेक्टरों में विभाजित कर अलग-अलग टीमों का गठन किया गया था। लगभग तीन माह तक चले इस अभियान के दौरान एकत्र आंकड़ों का पुनः सत्यापन कर उनकी प्रामाणिकता सुनिश्चित की गई। अंतिम डेटाबेस में प्रत्येक वृक्ष का वानस्पतिक विवरण, संरक्षण स्थिति, स्थान संबंधी जानकारी तथा उसकी विशिष्ट विशेषताओं को शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि वृक्ष गणना समिति के अध्यक्ष डॉ. अमिया कुमार सामल के नेतृत्व में पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान, वनस्पति विज्ञान, उद्यानिकी और भूगोल विभागों के 77 विद्यार्थियों तथा लगभग 30 उद्यान कर्मियों ने इस अभियान में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय में “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत 1,008 पौधों का रोपण भी किया गया। डॉ. अमिया कुमार सामल ने कहा कि ‘ट्री ऑफ बीएचयू’ केवल वृक्षों की गणना भर नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय की हरित संपदा की एक विशिष्ट पहचान है। उन्होंने बताया कि परिसर के सबसे पुराने वृक्ष की पहचान के प्रयास जारी हैं। सर्वेक्षण में अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) की विभिन्न संकट श्रेणियों में शामिल कई वृक्ष प्रजातियों का भी दस्तावेजीकरण किया गया है। अध्ययन में जामुन, इमली, महुआ, नीम, सागौन, बहेड़ा, अशोक, अर्जुन और चितवन सहित अनेक प्रमुख प्रजातियों के वृक्षारोपण पैटर्न का विवरण दर्ज किया गया है। साथ ही परिसर में स्थित पवित्र पीपल वृक्षों और हाल के वर्षों में विकसित मियावाकी शैली के शहरी हरित क्षेत्रों का भी उल्लेख किया गया है।

बीएचयू का यह वृक्ष अभिलेखन भारतीय विश्वविद्यालय परिसरों में किए गए सबसे व्यापक और वैज्ञानिक वृक्ष सर्वेक्षणों में से एक माना जा रहा है, जो भविष्य में जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरणीय नियोजन और सतत परिसर प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार करेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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