बीएचयू डालमिया छात्रावास और कमच्छा कैंपस के विकास के लिए डालमिया परिवार ने दिया प्रस्ताव

WhatsApp Channel Join Now
बीएचयू डालमिया छात्रावास और कमच्छा कैंपस के विकास के लिए डालमिया परिवार ने दिया प्रस्ताव


वाराणसी, 30 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) को विभिन्न आधारभूत सुविधाओं के उन्नयन तथा विकास कार्यों के लिए एक महत्वपूर्ण सहयोग का प्रस्ताव मिला है। यह प्रस्ताव स्वर्गीय दुलीचंद जी डालमिया के पौत्र तथा स्मृतिशेष सावित्री देवी डालमिया के पुत्र कुनाल डालमिया ने दिया है। डालमिया परिवार का विश्वविद्यालय में विद्यार्थी सुविधाओं के विकास में उल्लेखनीय योगदान रहा है। इस परिवार के सहयोग से विश्वविद्यालय में विज्ञान संस्थान स्थित डालमिया छात्रावास का निर्माण कराया गया था।

प्रस्ताव के तहत कुनाल डालमिया डालमिया छात्रावास में विभिन्न मरम्मत एवं नवीनीकरण कार्य कराएंगे। इनमें भवन की संरचनात्मक मरम्मत, वॉटरप्रूफिंग, रंग-रोगन, शौचालयों का नवीनीकरण, परिसर का सौंदर्यीकरण एवं हरित विकास तथा छात्रावास प्रांगण में बैडमिंटन और पिकलबॉल कोर्ट का निर्माण शामिल है। इसके अतिरिक्त, कुनाल डालमिया ने कमच्छा स्थित सेंट्रल हिन्दू बॉयज़ स्कूल परिसर में भी अनेक विकास कार्य कराने का प्रस्ताव दिया है। इनमें कमच्छा मार्ग की सीमा के साथ एक उद्यान का विकास, पक्षियों के अनुकूल वृक्ष प्रजातियों का रोपण कर हरित आवरण को सुदृढ़ करना, जलाशयों एवं फव्वारे का निर्माण, वर्षा जल संचयन प्रणाली की स्थापना तथा विद्यार्थियों के लिए बैडमिंटन एवं पिकलबॉल कोर्ट का निर्माण शामिल है।

उन्होंने महिला महाविद्यालय स्थित सावित्री देवी डालमिया विज्ञान भवन के मरम्मत एवं नवीनीकरण कार्य में भी सहयोग प्रदान करने का प्रस्ताव दिया है। यह जानकारी विश्वविद्यालय के जनसम्पर्क अधिकारी प्रो.राजेश सिंह ने मंगलवार काे दी। उन्होंने बताया कि हाल ही में कुनाल डालमिया ने कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी से भेंट कर इन विकास कार्यों के संबंध में अपना औपचारिक प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य शिक्षा एवं विद्यार्थी कल्याण के क्षेत्र में अपने परिवार की सेवा एवं परोपकार की परंपरा को आगे बढ़ाना है। कुलपति ने इस प्रस्ताव के लिए कुनाल डालमिया की सराहना की और कहा कि परोपकारी योगदान व सहयोग की अपने परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने की उनकी प्रतिबद्धता सराहनीय है।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

Share this story