बीएचयू में ‘टीच फॉर इंडिया’ के साथ करियर एवं प्लेसमेंट अवसरों पर संवाद

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बीएचयू में ‘टीच फॉर इंडिया’ के साथ करियर एवं प्लेसमेंट अवसरों पर संवाद


वाराणसी, 07 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के समाजशास्त्र विभाग के अंतर्गत संचालित एम.ए. इन सोशल वर्क कार्यक्रम में ‘टीच फॉर इंडिया’ के सहयोग से सोमवार को करियर, फेलोशिप और प्लेसमेंट अवसरों को लेकर विशेष संवाद सत्र आयोजित किया गया। सत्र में ‘टीच फॉर इंडिया’ की प्रतिनिधि डी. श्रद्धा ने विद्यार्थियों को संगठन के उद्देश्यों, कार्यप्रणाली, फेलोशिप कार्यक्रम तथा शिक्षा और सामाजिक विकास के क्षेत्र में उपलब्ध करियर अवसरों की जानकारी दी।

श्रद्धा ने बताया कि ‘टीच फॉर इंडिया’ का कार्य केवल शिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन, समान अवसर और नेतृत्व निर्माण के माध्यम के रूप में देखा जाता है। संगठन विशेष रूप से वंचित और हाशिये पर स्थित समुदायों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ने के साथ युवाओं को जमीनी शैक्षिक चुनौतियों को समझने तथा समुदायों के साथ काम करने का अवसर प्रदान करता है।

कार्यक्रम के दौरान एम.ए. इन सोशल वर्क के समन्वयक प्रो. विमल कुमार लहरी और डी. श्रद्धा के बीच भविष्य में विशेष व्याख्यान, प्रशिक्षण, फील्डवर्क, इंटर्नशिप, मेंटरिंग और प्लेसमेंट से जुड़ी संयुक्त गतिविधियां आयोजित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

प्रो. लहरी ने कहा कि समाज कार्य शिक्षा का उद्देश्य सामाजिक उत्तरदायित्व, मानवीय संवेदना और परिवर्तनकारी नेतृत्व से युक्त ऐसे पेशेवर तैयार करना है, जो शैक्षिक, आर्थिक और सामाजिक असमानताओं को कम करने में प्रभावी भूमिका निभा सकें। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सामाजिक न्याय, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, समान अवसर और वंचित समुदायों का सशक्तीकरण जरूरी है। ‘टीच फॉर इंडिया’ जैसे संगठनों के साथ शैक्षणिक एवं व्यावसायिक सहयोग से समाज कार्य के विद्यार्थियों को शिक्षा, बाल विकास, सामाजिक समावेशन और सामुदायिक नेतृत्व के क्षेत्र में काम करने के बेहतर अवसर मिल सकते हैं।

सत्र में विद्यार्थियों ने फेलोशिप, इंटर्नशिप और रोजगार से जुड़े अवसरों को लेकर विशेष रुचि दिखाई। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों के सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ना, उनकी व्यावसायिक दक्षताओं का विकास करना और प्रतिष्ठित सामाजिक संगठनों के साथ दीर्घकालीन शैक्षणिक एवं व्यावसायिक सहयोग की संभावनाओं को मजबूत करना था।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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