बीएचयू में ‘त्ज़ू ची महायान बौद्ध प्रैक्टिस सेंटर’ का उद्घाटन, 10 पूर्ण छात्रवृत्तियों की घोषणा

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बीएचयू में ‘त्ज़ू ची महायान बौद्ध प्रैक्टिस सेंटर’ का उद्घाटन, 10 पूर्ण छात्रवृत्तियों की घोषणा


वाराणसी, 29 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के पालि एवं बौद्ध अध्ययन विभाग में शुक्रवार को “त्ज़ू ची महायान बौद्ध प्रैक्टिस सेंटर” का विधिवत उद्घाटन किया गया। भारत में बौद्ध अध्ययन और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग के क्षेत्र में इसे एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। विशेष बात यह है कि किसी विदेशी बौद्ध संस्था द्वारा प्रायोजित यह देश का पहला बौद्ध केंद्र है।

उद्घाटन समारोह में ताइवान की विश्वप्रसिद्ध बौद्ध संस्था त्ज़ू ची फाउंडेशन की उपाध्यक्ष पी यू लिन तथा बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने संयुक्त रूप से केंद्र का उद्घाटन किया। इस अवसर पर कला संकाय की अधिष्ठाता प्रो. सुषमा घिल्डियाल भी उपस्थित रहीं।

समारोह के दौरान त्ज़ू ची फाउंडेशन ने पालि एवं बौद्ध अध्ययन विभाग के विद्यार्थियों के लिए 10 पूर्ण छात्रवृत्तियों की घोषणा भी की। छात्रवृत्तियों की घोषणा कुलपति प्रो. चतुर्वेदी की उपस्थिति में की गई।

पालि एवं बौद्ध अध्ययन विभाग तथा त्ज़ू ची फाउंडेशन के अंतरराष्ट्रीय सहयोग से स्थापित यह केंद्र बौद्ध दर्शन, करुणा, माइंडफुलनेस, मानवीय मूल्यों और अंतर-सांस्कृतिक शैक्षणिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्य करेगा।

कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह केंद्र वैश्विक शैक्षणिक सहयोग को नई दिशा देने के साथ-साथ बौद्ध विरासत और मानवीय मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि बौद्ध चिंतन आज भी विश्व शांति और सामाजिक सद्भाव के लिए प्रासंगिक है।

कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने समकालीन विश्व में शांति, सह-अस्तित्व और मानव कल्याण के लिए बौद्ध शिक्षाओं की आवश्यकता पर बल दिया। आयोजकों ने बताया कि इस केंद्र के माध्यम से थेरवाद और महायान बौद्ध साहित्य के प्रकाशन, अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, कार्यशालाओं, व्याख्यानमालाओं, ध्यान कार्यक्रमों तथा विविध शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।

उद्घाटन समारोह के उपरांत व्याख्यानमाला का शुभारंभ हुआ। प्रथम व्याख्यान त्ज़ू ची फाउंडेशन की उपाध्यक्ष पी यू लिन ने “अमितार्थसूत्र के अनन्त धम्म एवं अनन्त कल्याणमय जीवन तथा आज के विश्व में दुःख और विभाजन के प्रति बौद्ध धर्म का उत्तर” विषय पर प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म की करुणा, मैत्री और मानव सेवा की शिक्षाएँ वर्तमान विश्व की पीड़ा, तनाव और विभाजन का प्रभावी समाधान प्रस्तुत करती हैं।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में विदेशी छात्र, भिक्षु, शोधार्थी एवं विद्यार्थियों ने सहभागिता की और महायान बौद्ध शिक्षाओं से लाभान्वित हुए।

कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन पालि एवं बौद्ध अध्ययन विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार यादव ने किया। समारोह में अंतरराष्ट्रीय केंद्र के समन्वयक प्रो. राजेश सिंह, प्रो. सदाशिव द्विवेदी, प्रो. राकेश मैती, प्रो. डी.के. ओझा सहित अनेक शिक्षाविद एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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