वाराणसी: बीएचयू में “मास्टरपीस ऑफ भरहुत” पुस्तक का विमोचन, कुलपति ने सराहा

WhatsApp Channel Join Now
वाराणसी: बीएचयू में “मास्टरपीस ऑफ भरहुत” पुस्तक का विमोचन, कुलपति ने सराहा


— पुस्तक प्राचीन भरहुत स्तूप के ऐतिहासिक, पुरातात्विक और सांस्कृतिक महत्व को उजागर करती है

वाराणसी, 4 नवंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में वाराणसी स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में बुधवार को कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने डॉ. सुद्युम्न आचार्य द्वारा लिखित पुस्तक ‘मास्टरपीस ऑफ भरहुत’ का विमोचन किया। भारत के राष्ट्रपति द्वारा ‘राष्ट्रीय पंडित’ की उपाधि से सम्मानित डॉ. आचार्य की यह पुस्तक मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित प्राचीन भरहुत स्तूप की ऐतिहासिक, पुरातात्विक और सांस्कृतिक विरासत को विस्तार से प्रस्तुत करती है।

विमोचन समारोह में कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि वह स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें बीएचयू जैसे पवित्र और प्रतिष्ठित संस्थान से जुड़ने का अवसर मिला है, जहां निरंतर उल्लेखनीय और सार्थक कार्य हो रहे हैं। पुस्तक में भरहुत को प्रारंभिक भारतीय बौद्ध कला और स्थापत्य का महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए वहां प्राप्त मूर्तियों, शिलालेखों, रेलिंगों, प्रवेश द्वारों और वास्तुशिल्पीय अवशेषों का ऐतिहासिक विश्लेषण किया गया है। इसमें भरहुत स्तूप की कलात्मक विशेषताओं के साथ भारतीय बौद्ध कला एवं वास्तुकला के विकास में उसके योगदान को भी रेखांकित किया गया है।

पुस्तक का एक महत्वपूर्ण पक्ष भरहुत स्तूप की पुनः खोज और उसके पुरातात्विक दस्तावेजीकरण में सर अलेक्जेंडर कनिंघम की भूमिका का उल्लेख है। इसके साथ ही भरहुत से प्राप्त शिलालेखों का विश्लेषण करते हुए शुंग कालीन इतिहास, तत्कालीन सामाजिक-सांस्कृतिक परिस्थितियों और बौद्ध स्मारकों को प्राप्त राज्याश्रय के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां प्रस्तुत की गई हैं।

पुस्तक में भरहुत की रेलिंगों और प्रवेश द्वारों पर उकेरी गई कलाकृतियों की उत्कृष्टता तथा उनके ऐतिहासिक संदर्भों को भी विस्तार से समझाया गया है। साथ ही, भारत की प्राचीन बौद्ध विरासत के संरक्षण और उसके व्यवस्थित दस्तावेजीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। चित्रों से समृद्ध यह पुस्तक विद्वानों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के साथ ही भारतीय इतिहास, बौद्ध अध्ययन, कला एवं पुरातत्व में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री के रूप में महत्वपूर्ण है। इसका उद्देश्य भरहुत की ऐतिहासिक और कलात्मक विरासत को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाना तथा भावी पीढ़ियों के लिए इस महत्वपूर्ण पुरातात्विक धरोहर के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

विमोचन समारोह में भारत कला भवन के निदेशक प्रो. श्रीरूप रायचौधरी, उपनिदेशक डॉ. निशांत, पिलग्रिम प्रकाशन के रामानंद तिवारी, संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के विभागाध्यक्ष प्रो. सदाशिव द्विवेदी, प्रो. शरदिंदु तिवारी और प्रो. अभिमन्यु सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।-------------

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

Livevns.news Desk
Livevns.news Desk

772373 Articles

Share this story