काशी की आध्यात्मिक महिमा को समर्पित भोजपुरी गीत मनवा के हमरा बनारस बना दs रिलीज
वाराणसी,05 अगस्त (हि.स.)। श्रावण मास के पावन अवसर पर महादेव और काशी की आध्यात्मिक महिमा को समर्पित भोजपुरी भक्ति गीत 'हे भोले बाबा, मनवा के हमरा बनारस बना दs.... भोजपुरी आईटी सेल के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर रिलीज हो गया है।
बुधवार को यह जानकारी गीत के रचनाकार मनोज 'भावुक' ने दी।
उन्होंने बताया कि यह गीत उनके लिए केवल एक भक्ति-गीत नहीं, बल्कि बनारस के प्रति उनकी श्रद्धा, आस्था और जीवन-दृष्टि की संगीतमय अभिव्यक्ति है। इसमें उन्होंने बनारस को केवल एक शहर नहीं, बल्कि भक्ति, मुक्ति और आत्मिक चेतना के प्रतीक के रूप में देखने का प्रयास किया गया है।
मनोज भावुक बताते है कि यह दरअसल महादेव से एक प्रार्थना है कि हमारे भीतर ऐसा 'बनारस' बस जाए, जहाँ जीवन के सुख-दुख से ऊपर उठकर शिव की मस्ती, करुणा, संतुलन और आत्मिक शांति का वास हो। गीत के अंतरों में काशी विश्वनाथ मंदिर, मणिकर्णिका घाट, धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष और लंका चौराहे जैसे प्रतीकों के माध्यम से जीवन के गहरे आध्यात्मिक और दार्शनिक प्रश्नों को सरल भोजपुरी में व्यक्त किया गया है। काशी विश्वनाथ के मंदिर धर्म के राह धरावत बाटे, मणिकर्णिका के घाट त मोक्ष के राज बतावत बाटे, संगही दूगो रस्ता बा जे माया में अझुरावत बाटे, धर्म-अर्थ आ काम-मोक्ष के राह प बा लंका चौराहा, केने जाईं, सोचत बाटे, चौराहा पर इक बउराहा...।
मनोज भावुक का कहना है कि बनारस केवल एक भूगोल नहीं, बल्कि मन की वह अवस्था है, जहाँ भक्ति, करुणा, वैराग्य और आत्मिक शांति एक साथ निवास करते हैं। यही इस गीत का मूल भाव है। बनारस की आध्यात्मिक महिमा पर भोजपुरी में बहुत कम गीत लिखे गए हैं। उन्हें पूरा विश्वास है यह गीत शिवभक्तों के साथ-साथ संगीत और साहित्य प्रेमियों के हृदय को भी स्पर्श करेगा। इस भक्तिमय गीत को सुप्रसिद्ध गायिका सुरभि कश्यप और गायक अर्जुन पांडेय ने स्वर दिया है। संगीत भोजपुरी फिल्म जगत को कई लोकप्रिय गीत दे चुके रजनीश मिश्रा का है। गीत की परिकल्पना आस्था द्विवेदी ने की है। निर्देशक सुमित तिवारी, छायाकार सुधांशु सिंह, वीडियो निर्माण वन शॉट फिल्मस तथा निर्माता शैलेंद्र द्विवेदी हैं।
बताते चले कि गीतकार मनोज भावुक और संगीतकार रजनीश मिश्रा की जोड़ी पहले भी 'तोर बउरहवा रे माई', 'आपन कहाये वाला के बा', 'दुलहिनिया नाच नचावे' और 'मेरे राम' जैसे चर्चित और यादगार गीत दे चुके हैं। मनोज भावुक बताते है कि आज गीतों की दुनिया में व्यूज़ की होड़ है। लेकिन मेरा मानना है कि व्यूज़ से भी ज्यादा ज़रूरी यह है कि भोजपुरी में ऐसे गीत लिखे जाएँ जो हमारी संस्कृति, हमारी आस्था और हमारी आत्मा से जुड़ें। अगर 'हे भोले बाबा, मनवा के हमरा बनारस बना दs' सुनकर किसी श्रोता के मन में बनारस बस जाए, महादेव के प्रति श्रद्धा और गहरी हो जाए, तो मैं समझूँगा कि मेरा गीत सफल हो गया।
ये है गीत का मुखड़ा हे भोले बाबा, हे शंभु बाबा, मनवा के हमरा बनारस बना दs, दुख हो या सुख हो, मस्ती में राखs, जिनगी के नइया पार लगा दs...---------------
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

