बीएचयू की शोध छात्रा गुनिया यादव को सर्वश्रेष्ठ शोधपत्र से सम्मानित किया गया

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बीएचयू की शोध छात्रा गुनिया यादव को सर्वश्रेष्ठ शोधपत्र से सम्मानित किया गया


वाराणसी, 14 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व विभाग की शोध छात्रा गुनिया यादव को “सर्वश्रेष्ठ शोधपत्र (नमिता जोशी स्वर्ण पदक)” से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान भारतीय पुरातत्व सोसाइटी, भारतीय प्रागैतिहासिक एवं चतुर्थक अध्ययन सोसाइटी तथा इतिहास और संस्कृति सोसाइटी द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित वार्षिक सम्मेलन में प्रदान किया गया। यह सम्मेलन 9 से 11 जनवरी 2026 तक लखनऊ विश्वविद्यालय के मानवशास्त्र विभाग में आयोजित हुआ। यह जानकारी बीएचयू के जनसंपर्क कार्यालय द्वारा दी गई। बताया गया कि गुनिया यादव, रामा यादव की पुत्री हैं और उत्तर प्रदेश के गाज़ीपुर जनपद के मनिहारी ब्लॉक स्थित हरौली गाँव की निवासी हैं। उन्होंने “निज़ामाबाद और उसके आस-पास मृद्भांड निर्माण परंपरा की निरंतरता: एक नृवंशविज्ञानिक सर्वेक्षण” शीर्षक से अपना शोधपत्र प्रस्तुत किया। अपने शोध में उन्होंने निज़ामाबाद तथा उसके आसपास के पारंपरिक कुम्हार समुदाय के जीवन, सांस्कृतिक निरंतरता और मृद्भांड निर्माण की परंपराओं का गहन नृवंशविज्ञानिक अध्ययन किया है। विशेष रूप से उनके शोध का केंद्र महिलाओं की भूमिका, उनके प्रायः अदृश्य श्रम तथा पारंपरिक शिल्प के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण की संभावनाओं पर रहा है।

गुनिया यादव का यह शोध कार्य डॉ. विराग सोनटक्के के निर्देशन में संचालित हो रहा है। विभाग के वर्तमान अध्यक्ष प्रोफेसर महेश प्रसाद अहिरवार के नेतृत्व में प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व विभाग में पुरातत्व एवं सांस्कृतिक अध्ययन के क्षेत्र में उच्च स्तरीय शोध को निरंतर प्रोत्साहन मिल रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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