काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव नगर भ्रमण पर निकले, पुष्पवर्षा के बीच उतारी गई आरती

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काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव नगर भ्रमण पर निकले, पुष्पवर्षा के बीच उतारी गई आरती


काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव नगर भ्रमण पर निकले, पुष्पवर्षा के बीच उतारी गई आरती


काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव नगर भ्रमण पर निकले, पुष्पवर्षा के बीच उतारी गई आरती


-भक्ति और उल्लास के साथ निकली पारंपरिक शोभायात्रा, श्रद्धालुओं और विशिष्ट जनों की रही व्यापक सहभागिता

वाराणसी, 16 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के अवसर पर गुरुवार को 'काशी के कोतवाल' बाबा कालभैरव परंपरागत रूप से नगर भ्रमण पर निकले। विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा मेले के प्रथम दिवस आयोजित इस भव्य शोभायात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बना। नगर भ्रमण से पूर्व बाबा कालभैरव की पंचबदन स्वर्ण-रजत प्रतिमा को विधि-विधान से रथ पर विराजमान कर विशेष आरती उतारी गई।

स्वर्णकार क्षत्रिय कमेटी की ओर से चौखंभा स्थित काठ की हवेली से प्रातः श्रद्धा और उल्लास के साथ शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ।

विशाल डमरुओं की गूंज और जयघोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। शोभायात्रा के अग्रभाग में घुड़सवार पुलिस दल चल रहा था। उसके पीछे ताशा-बाजा, ध्वज-पताकाएं लिए श्रद्धालु, छत्रयुक्त घोड़ों पर देवस्वरूप धारण किए कलाकार, बाबा के गणों की झांकियां तथा बैंड और पाइप बैंड की आकर्षक प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करती रहीं। शोभायात्रा में कमेटी के संस्थापक स्वर्गीय किशुनदास और स्वर्गीय भीखू सिंह के चित्रों को सुसज्जित ट्रॉली पर स्थापित किया गया था। उनके परिजनों के साथ विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि भी यात्रा में शामिल हुए।

यह शोभायात्रा चौखंभा स्थित काठ की हवेली से प्रारंभ होकर बीबी हटिया, जतनबर, विशेश्वरगंज, महामृत्युंजय, दारानगर, मैदागिन, बुलानाला, चौक, नारियल बाजार, गोविंदपुरा, ठठेरी बाजार, सोराकुआं, गोलघर और भुतही इमली होते हुए भैरोनाथ चौराहे पर संपन्न हुई। इस वर्ष शोभायात्रा में मां वैष्णो देवी की आकर्षक झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। नीरज सेठ के नेतृत्व में न्यू लाइफ इवेंट प्लानर के कलाकार भजनों की प्रस्तुति देते हुए पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं को भक्तिरस से सराबोर करते रहे। इसके अतिरिक्त गोविंदेश्वर महादेव, हनुमान जी की झांकी और डमरू दल की प्रस्तुति ने शोभायात्रा की भव्यता को और बढ़ाया।

स्वर्णकार क्षत्रिय कमेटी के अध्यक्ष घनश्याम सेठ 'बच्चा' ने बताया कि शोभायात्रा मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने बाबा कालभैरव का पुष्पवर्षा से स्वागत किया। पूजन-अर्चन कर आरती उतारी। अनेक सामाजिक संगठनों और भक्तों ने चयनित स्थलों पर स्वागत मंच बनाकर बाबा के दर्शन किए।

उन्होंने बताया कि कालभैरव मंदिर में सायंकाल पंडित जयकृष्ण दीक्षित के आचार्यत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बसंत पूजा संपन्न होगी, जबकि रात्रि 11 बजे बाबा की महाआरती आयोजित की जाएगी।

घनश्याम सेठ ने बताया कि परंपरा के अनुसार काशी नगरी में विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा मेले के प्रथम दिन बाबा कालभैरव की स्वर्ण-रजत प्रतिमा प्रतीकात्मक रूप से नगर भ्रमण पर निकलती है। मान्यता है कि इस भ्रमण के माध्यम से काशी के कोतवाल नगर की व्यवस्थाओं का अवलोकन करते हैं तथा अपने भक्तों के सुख-दुख का प्रतीकात्मक रूप से श्रवण करते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार बाबा कालभैरव की अनुमति के बिना काशी में किसी का प्रवेश या निवास पूर्ण नहीं माना जाता। इसी कारण उन्हें काशी का कोतवाल और नगर का रक्षक कहा जाता है। उन्होंने बताया कि स्वर्णकार क्षत्रिय कमेटी के पदाधिकारियों के अनुसार वर्ष 1954 में निर्मित बाबा कालभैरव की स्वर्ण-रजत पंचबदन प्रतिमा की यह पारंपरिक शोभायात्रा प्रत्येक वर्ष आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को निकाली जाती है। इसमें पूर्वांचल और काशी के जनप्रतिनिधि, राज्यमंत्री, मठ-मंदिरों के पीठाधीश्वर, सामाजिक एवं आध्यात्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा स्वर्णकार समाज के हजारों लोग श्रद्धापूर्वक सहभागिता करते हैं।

इस वर्ष इनकी रही खास उपस्थिति

बाबा कालभैरव के शोभायात्रा में आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालु, विधायक व पूर्व मंत्री डॉ नीलकंठ तिवारी, पाषर्द संजय विश्वंभरी, मनोज यादव, कनकलता मिश्रा, पूर्व पाषर्द बृजकिशोर दास, रविशंकर सिंह, अशोक सेठ, किशोर सेठ, मनोज सिंह, मनोज सिंह आदि ने उपस्थिति दर्ज कराई। इन अतिथियों को अंगवस्त्र प्रदान कर अभिनंदन किया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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