राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय के प्रशिक्षु अधिकारियों ने बरेका में देखा लोको निर्माण का कौशल

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राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय के प्रशिक्षु अधिकारियों ने बरेका में देखा लोको निर्माण का कौशल


वाराणसी, 19 मार्च (हि. स.) l उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में गुरुवार को राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय, रक्षा मंत्रालय, नई दिल्ली के 17 सदस्यीय प्रशिक्षु अधिकारियों के दल ने भ्रमण किया। यह दल एयर मार्शल मनीष कुमार गुप्ता, कमांडेंट, नेशनल डिफेंस कॉलेज के नेतृत्व में तथा उत्तर प्रदेश के नोडल अधिकारी आनंद कुमार पाण्डेय के साथ बनारस रेल इंजन कारखाना पहुंचा। इस भ्रमण का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा एवं सामरिक अध्ययन के अंतर्गत भारत की औद्योगिक क्षमता, विशेष कर रेल इंजन निर्माण में तकनीकी उत्कृष्टता, गुणवत्ता मानकों एवं सुरक्षा उपायों को निकट से समझना था। बरेका आगमन पर जन सम्पर्क अधिकारी राजेश कुमार ने दल का स्वागत एवं अभिनंदन किया । इसके पश्चात मुख्य विद्युत इंजीनियर-लोको अरविंद कुमार जैन ने प्रशिक्षु अधिकारियों को लोको फ्रेम शॉप, लोको असेम्बली शॉप एवं लोको टेस्ट शॉप का विस्तृत भ्रमण कराया। अधिकारियों ने आधुनिक तकनीकों से युक्त लोको निर्माण की जटिल प्रक्रिया, गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली तथा उच्च स्तरीय सुरक्षा मानकों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।

भ्रमण के उपरांत प्रशासन भवन स्थित कीर्ति कक्ष में महाप्रबंधक आशुतोष पंत की अध्यक्षता में एक शिष्टाचार बैठक आयोजित की गई। बैठक में महाप्रबंधक ने बरेका की उपलब्धियों, तकनीकी प्रगति एवं वैश्विक पहचान पर प्रकाश डाला। इसके पश्चात मुख्य विद्युत इंजीनियर-लोको ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से बरेका की स्थापना से लेकर वर्तमान तक की विकास यात्रा एवं लोको उत्पादन क्षमता की विस्तृत जानकारी दीl

संवाद सत्र के दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका महाप्रबंधक आशुतोष पंत एवं प्रमुख मुख्य विद्युत इंजीनियर एस.के. श्रीवास्तव ने विस्तारपूर्वक उत्तर दिया । प्रतिनिधिमंडल ने बरेका की तकनीकी दक्षता एवं उत्कृष्ट कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए भ्रमण को अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी बताया।

उल्लेखनीय है कि इस दल में भारतीय सशस्त्र बलों के ब्रिगेडियर स्तर के वरिष्ठ अधिकारी के साथ-साथ सिविल सेवाओं के अधिकारी एवं श्रीलंका, मंगोलिया, मालदीव, अर्मेनिया एवं ब्राजील के सैन्य अधिकारी भी शामिल थे, जिससे यह भ्रमण अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं अनुभव साझा करने का एक महत्वपूर्ण मंच बन गया l

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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