न्यायालय में गवाहों की अनुपस्थिति या शिथिल पैरवी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं : जिलाधिकारी
— अभियोजन कार्यों की समीक्षा बैठक में गंभीर मामलों की प्रभावी पैरवी और समयबद्ध निस्तारण पर दिया जोर
वाराणसी, 17 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित अभियोजन कार्यों की मासिक समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि न्यायालय में गवाहों की अनुपस्थिति अथवा शिथिल पैरवी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को समयबद्ध न्याय दिलाना शासन और प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है, जिसके लिए सभी अभियोजन अधिकारी और शासकीय अधिवक्ता पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य करें।
बैठक में जिलाधिकारी ने शासकीय अधिवक्ताओं एवं अभियोजन अधिकारियों से लंबित और निस्तारित मामलों की प्रगति की विस्तृत जानकारी ली तथा प्रभावी मॉनिटरिंग के माध्यम से मुकदमों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एक्साइज एक्ट, पॉक्सो एक्ट, एनडीपीएस एक्ट, एससी-एसटी एक्ट, हत्या, डकैती, बलात्कार और शस्त्र अधिनियम जैसे गंभीर मामलों को प्राथमिकता के आधार पर चिह्नित कर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि न्यायालयों में लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए सभी संबंधित विभागों और पक्षों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने आवश्यक अभिलेखों, प्रतिवेदनों और अन्य दस्तावेजों का समय से आदान-प्रदान सुनिश्चित करने के साथ ही ऑनलाइन डाटा समय पर फीड कराने के निर्देश भी दिए।
समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने कोर्ट केस रजिस्ट्रेशन, जमानत प्रकरणों के निस्तारण, केस डिस्पोजल, लिपिकीय आपत्तियों, अपील एवं रिवीजन, चार्जशीट, चार्ज फ्रेम, अंतिम बहस, गवाहों की उपस्थिति एवं परीक्षण तथा अभियोजन स्वीकृति से जुड़े मामलों की प्रगति का गहन परीक्षण किया।
उन्होंने विशेष रूप से महिला एवं बालिका उत्पीड़न, अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार, गैंगस्टर, पॉक्सो, शस्त्र अधिनियम, दहेज मृत्यु, अपहरण और अन्य संगीन अपराधों से संबंधित मामलों में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि अधिक से अधिक मामलों में राज्य सरकार के पक्ष में दोषसिद्धि हो सके।
जिलाधिकारी ने कहा कि सभी अभियोजन अधिकारी नियमित समन्वय बनाए रखें और गवाहों की समय पर न्यायालय में उपस्थिति एवं परीक्षण सुनिश्चित करें। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि प्रत्येक अभियोजन अधिकारी अपने-अपने न्यायालय में लंबित गंभीर मामलों की सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर उनकी प्रभावी पैरवी करें, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आए और पीड़ितों को शीघ्र न्याय मिल सके।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

