सभी आकृतियां, शिल्प कृतियां,कला कृतियां सुरक्षित, कार्य पूर्ण होते ही होंगी यथास्थान पुनः स्थापित : आयुष मंत्री

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सभी आकृतियां, शिल्प कृतियां,कला कृतियां सुरक्षित, कार्य पूर्ण होते ही होंगी यथास्थान पुनः स्थापित : आयुष मंत्री


वाराणसी , 20 जनवरी (हि. स.) । उत्तर प्रदेश के आयुष मंत्री डा. दयाशंकर मिश्र 'दयालु ' ने हाल के दिनों में मणिकर्णिका घाट को लेकर उठे विवाद पर स्थिति स्पष्ट की है। मंगलवार को आयुष मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में काशी आज अपने दिव्य और भव्य स्वरूप के कारण पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित कर रही है। वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 7.26 करोड़ श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों का स्वागत कर वाराणसी ने नया इतिहास रचा है। काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के बाद अब मणिकर्णिका घाट का समग्र और गरिमामयी पुनर्विकास काशी की आध्यात्मिक आत्मा को और अधिक सशक्त बना रहा है।

उन्होंने कहा कि मणिकर्णिका घाट पर 17.56 करोड़ रूपये की लागत से रैंप, वुड प्लाजा, व्यूइंग एरिया, बेहतर एक्सेस पाथ, रूफटॉप एवं वीआईपी सीटिंग जैसी आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल सुविधाएँ विकसित की जा रही हैं। इस परियोजना की नींव वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रखी गई थी, जिसे 2026 तक पूर्ण किया जाना है। परियोजना का उद्देश्य मोक्ष के इस पावन द्वार को और अधिक सम्मानजनक, सुव्यवस्थित बनाना है, वह भी आस्था और परंपरा की पवित्रता को अक्षुण्ण रखते हुए।

आयुष मंत्री ने कहा कि मणिकर्णिका घाट पुनर्विकास परियोजना को रुपा फाउंडेशन द्वारा अपनी सीएसआर (कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व) प्रतिबद्धताओं के अंतर्गत वित्तपोषित एवं क्रियान्वित किया जा रहा है। यह परियोजना पिछले एक वर्ष से क्रियान्वयन की अवस्था में है। इसके तहत दाह-संस्कार से जुड़ी व्यवस्थाओं—जैसे चिता प्लेटफॉर्म, लकड़ी भंडारण व विक्रय क्षेत्र, पूर्व-क्रिया स्थल, मुंडन क्षेत्र, आगंतुकों के बैठने की सुविधा, शौचालय एवं पेयजल व्यवस्था—को बेहतर और व्यवस्थित किया जा रहा है।

मंत्री ने बताया कि घाट की सीढ़ियों पर आरंभ किए गए पुनर्निर्माण कार्य के दौरान सीढ़ियों से सटी ‘मढ़ी’ की दीवारों पर स्थापित कुछ आकृतियाँ, शिल्पकृतियाँ एवं मूर्तियाँ ध्वस्तीकरण के समय अपनी जगह से हटकर नीचे आ गई थीं। इस प्रक्रिया में प्रभावित हुई सभी मूर्तियों और शिल्पकृतियों को पूरी तरह सुरक्षित रूप से एकत्र कर संरक्षण में रखा गया है, ताकि कार्य पूर्ण होने के बाद उन्हें यथाशीघ्र अपने मूल स्वरूप और स्थान पर पुनः स्थापित किया जा सके।स्पष्ट किया गया है कि मणिकर्णिका घाट पर स्थित मसानेनाथ मंदिर, महाकाल मंदिर, तारकेश्वर महादेव मंदिर सहित सभी मंदिर पूर्णतः सुरक्षित हैं और उन्हें किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। सोशल मीडिया पर यह दिखाने का प्रयास किया जा रहा है कि मंदिरों को क्षति पहुंचाई जा रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि केवल दाह-संस्कार से जुड़ी सुविधाओं का उन्नयन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार माँ गंगा, पावन घाटों और सनातन परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए संकल्पबद्ध है। मंत्री ने कांग्रेस पर दशकों तक घाट की उपेक्षा, भ्रम फैलाने और विरोध की राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि काशी केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि आस्था, विरासत और विकास के संगम के रूप में वैश्विक पहचान स्थापित कर रही है। जनता यह देख और समझ रही है कि काशी का यह स्वर्णिम युग इसी सशक्त और दूरदर्शी नेतृत्व में संभव हुआ।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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