दशाश्वमेध घाट पर अमर शहीदों की स्मृति में आकाशदीप प्रज्ज्वलन के 27 वर्ष पूरे
——कारगिल विजय के बाद गंगा सेवा निधि ने आकाशदीप परंपरा को दिया राष्ट्रवाद का स्वरूप ——पूरे कार्तिक मास शहीदों की स्मृति में जलेंगे दीप
वाराणसी, 27 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में गंगा घाटों पर पूर्वजों की स्मृति में आकाशदीप प्रज्ज्वलित करने की सदियों पुरानी परंपरा को राष्ट्रभक्ति से जोड़ते हुए गंगा सेवा निधि ने मंगलवार को दशाश्वमेध घाट पर आकाशदीप प्रज्ज्वलन की शुरुआत की। कार्तिक मास के प्रथम दिन गणपति वंदना और देशभक्ति गीतों के बीच आयोजित कार्यक्रम में भारत के अमर वीर योद्धाओं और शहीदों की स्मृति में आकाशदीप जलाए गए। इसी के साथ अमर शहीदों के सम्मान में आकाशदीप प्रज्ज्वलित करने की परंपरा के 27 वर्ष पूरे हो गए।
दशाश्वमेधघाट पर नित्य सायंकालीन गंगा आरती का आयोजन करने वाली संस्था गंगा सेवा निधि की ओर से आयोजित कार्यक्रम में संस्था के संस्थापक स्वर्गीय पं. सत्येंद्र मिश्र को श्रद्धासुमन अर्पित कर उनके नाम पर भी आकाशदीप प्रज्ज्वलित किया गया। इस अवसर पर वाराणसी के महापौर अशोक तिवारी, अन्नपूर्णा मठ मंदिर के महंत शंकरपुरी, 39 जीटीसी के ब्रिगेडियर उमेश ए. परब, 95वीं बटालियन सीआरपीएफ के कमांडेंट राजेश्वर बालापुरकर, 4 एयर फोर्स सेलेक्शन बोर्ड के ग्रुप कैप्टन सचित सूद तथा 11वीं बटालियन एनडीआरएफ के कमांडिंग ऑफिसर अनुप सिंह बिष्ट सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
अतिथियों का स्वागत संस्था के अध्यक्ष सुशांत मिश्र, संरक्षक पं. इंदुशेखर शर्मा और उपाध्यक्ष पंकज अग्रवाल ने किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रो. रेवती साकलकर ने गायन प्रस्तुत किया। तबले पर संगीत कुमार और हारमोनियम पर पंकज मिश्र ने संगत की। प्रस्तुतियों के माध्यम से अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम के अंत में संस्था के सचिव सुरजीत कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
——कारगिल विजय के बाद आकाशदीप परंपरा को मिला राष्ट्रीय स्वरूप
गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्र ने बताया कि वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध में भारत की विजय के बाद संस्था ने अमर शहीदों की पुण्य स्मृति में आकाशदीप प्रज्ज्वलन के संकल्प का विस्तार करते हुए इसे राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। इसके तहत देश के अमर वीर योद्धाओं के सम्मान में पूरे कार्तिक मास गंगा घाट पर आकाशदीप जलाए जाते हैं।
उन्होंने बताया कि आध्यात्मिकता और राष्ट्रवाद को समर्पित संस्था के भव्य देव-दीपावली महोत्सव के साथ आकाशदीप प्रज्ज्वलन का समापन होता है। इस अवसर पर देश के वीर बलिदानियों के सम्मान में उन्हें ‘भगीरथ शौर्य सम्मान’ से सम्मानित कर नमन किया जाता है।
सुशांत मिश्र के अनुसार, काशी में सदियों से कार्तिक मास में गंगा घाटों पर आकाशदीप जलाने की परंपरा चली आ रही है। मान्यता है कि ये दीप दिवंगत पूर्वजों की स्वर्गलोक यात्रा के मार्ग को आलोकित करते हैं। आकाशदीप से जुड़ी धार्मिक कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि महाभारत युद्ध में प्राण गंवाने वाले वीरों की स्मृति में भीष्म ने कार्तिक मास में दीपमालाओं के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की थी।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध के बाद संस्था ने अतीत से लेकर वर्तमान तक देश के लिए बलिदान देने वाले वीर योद्धाओं की स्मृति में आकाशदीप जलाने का संकल्प लिया। इस पहल ने काशी की प्राचीन धार्मिक परंपरा को राष्ट्रभक्ति और शहीदों के प्रति कृतज्ञता के भाव से जोड़ दिया। कार्तिक मास की महिमा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि गंगा के घाटों पर प्रज्ज्वलित आकाशदीप शहीदों के प्रति देशवासियों की अटूट श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक हैं। देव-दीपावली महोत्सव में ‘भगीरथ शौर्य सम्मान’ के माध्यम से वीर बलिदानियों को नमन करना इसी भावना का विस्तार है।
——सीआरपीएफ, सेना और अन्य सुरक्षा बलों के बलिदानियों की स्मृति में जलेंगे दीप
गंगा सेवा निधि की ओर से पूरे कार्तिक मास देश के विभिन्न सुरक्षा बलों के अमर बलिदानियों की स्मृति में आकाशदीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। इनमें पांचवीं बटालियन सीआरपीएफ के बलिदानी शशिकांत सिंह और सेवा के दौरान सड़क दुर्घटना में शहीद हुए 183वीं बटालियन सीआरपीएफ के सुनील कुमार शामिल हैं। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), भारतीय थल सेना, भारतीय वायु सेना, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) तथा पुलिस बल के वीर जवानों की स्मृति में भी आकाशदीप जलाए जाएंगे।
संस्था के संस्थापक स्वर्गीय पं. सत्येंद्र मिश्र के नाम पर प्रज्ज्वलित आकाशदीप के साथ शुरू हुई यह पहल काशी की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक आस्था और राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों के प्रति सम्मान का संदेश भी है।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

