परिवार व्यवस्था एवं हिन्दू संस्कार की मजबूती से ही सुरक्षित रहेगा धर्म : मिथलेश नारायण

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परिवार व्यवस्था एवं हिन्दू संस्कार की मजबूती से ही सुरक्षित रहेगा धर्म : मिथलेश नारायण


कानपुर, 15 जनवरी (हि.स.)। हमारे वैदिक ऋषि-मुनियों द्वारा स्थापित मूल्य आज भी पूरी तरह से प्रासंगिक हैं। भारत की संस्कृति में माता-पिता को भगवान से पहले पूजा जाता है, यही हमारी पहचान है। यदि परिवार व्यवस्था और हिन्दू संस्कार कमजोर होंगे तो धर्म भी सुरक्षित नहीं रह पाएगा। यह बातें गुरुवार को बीएनएसडी शिक्षा निकेतन में आयोजित हिंदू सम्मेलन में बतौर मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के बौद्धिक शिक्षण प्रमुख मिथलेश नारायण ने कही।

उन्होंने आगे कहा कि वैदिक और महाभारत काल में छुआछूत जैसी कोई प्रथा नहीं थी, यह बाद में उत्पन्न हुई। भगवान श्रीकृष्ण ने दुर्योधन का भोज ठुकराकर विदुर जैसे साधारण परिवार के यहां भोजन किया, जो समानता का संदेश देता है। आज की स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि लोग पालतू पशुओं को तो महत्व देते हैं, लेकिन माता-पिता का सम्मान नहीं करते। उन्होंने दक्षिण भारत के उडुपी मंदिर की महत्ता बताते हुए वहां दर्शन करने का आग्रह किया। साथ ही कहा कि प्रत्येक हिन्दू घर में दुर्गा और सरस्वती के साथ श्रीराम, हनुमान, भगत सिंह और चन्द्रशेखर आज़ाद के आदर्श होने चाहिए, तभी हिन्दू धर्म सुरक्षित रहेगा। उन्होंने छुआछूत-मुक्त समाज, जल संरक्षण और पंच परिवर्तन के पालन पर भी जोर दिया।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संघ-शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में राष्ट्रभर में आयोजित हो रहे हिन्दू सम्मेलनों की श्रृंखला चल रही है। इसी क्रम में गुरुवार को बीएनएसडी शिक्षा निकेतन इंटर कॉलेज के प्रांगण में बेनाझाबर बस्ती, आर्यनगर (कानपुर उत्तर) द्वारा विराट हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया।

हिन्दू सम्मेलन की विशालता बस्ती से आने वाले बालवृन्द, युवक-युवतियां, किशोर, प्रौढ, व बृद्ध सभी ढोल तासो एवं भारत माता की जय, जय जय श्रीराम के गगन भेदी उद्घोष के साथ उत्साह पूर्वक भारी संख्या में हाथों में भगवा ध्वज लेकर एक जुटता के साथ कार्यक्रम स्थल पहुंचकर लधु भारत प्रदर्शित किया। बालक बालिकायें रानी लक्ष्मीबाई, अहिल्याबाई, भारत माता, श्रीराम एवं हनुमान जी की वेशभूषा धारण कर प्रांगण की आभा में उत्साह का संचार कर रहे थे।

रामकृष्ण मिशन आश्रम कानपुर के सहसचिव स्वामी नरेश्वरानन्द महाराज, कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के बौद्धिक शिक्षण प्रमुख मिथलेश नारायण तथा यती संकल्प संस्थान की सचिव नीतू सिंह के मार्गदर्शन को लेकर सभी प्रतिभागियों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। कार्यक्रम के दौरान हिन्दू तन-मन, हिन्दू जीवन—हिन्दू मेरा परिचय, हिन्दू को जगाएंगे, भारत को भव्य बनाएंगे और जय जय श्रीराम के ओजस्वी जयकारों से वातावरण गूंजता रहा।

रामकृष्ण मिशन आश्रम कानपुर के सहसचिव स्वामी नरेश्वरानन्द महाराज ने अपने वक्तव्य में कहा कि स्वामी विवेकानन्द जी में किसी को भी सम्मोहित करने की कला थी। उन्होंने हिन्दू धर्म की नींव को मजबूत किया था एवं समूचे विश्व को हिन्दू दर्शन के गौरव से परिचित कराया।

यती संकल्प संस्थान की सचिव नीतू सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान में हिन्दू समाज एकत्रीकरण की ओर अग्रसर है। पर्यावरण संरक्षण वर्तमान समाज के लिये आवश्यक है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रचारक भी किसी सन्त से कम नहीं होता। संघ के शताब्दी वर्ष में पंच परिवर्तन जैसे आवश्यक तत्वों का विचार रखा जिसमें सामाजिक समरसता मुख्य है। आगे कहा, हमें समस्त समाज को एक सूत्र में पिरोने की आवश्यकता है। कुटुम्ब प्रबोधन के विचार का अनुसरण करने की जरूरत है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता बेनाझाबर बस्ती के उमा शंकर भारती ने की। कार्यक्रम का समापन भारत माता की आरती के पश्चात हुआ।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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