वाराणसी नगर निगम का बड़ा अभियान : 100 करोड़ की सरकारी संपत्ति कराई कब्जा मुक्त
—38 साल पुराने विवाद का अंत, बीएलडब्ल्यू रोड स्थित पोखरी से हटाया अवैध कब्जा
वाराणसी, 27 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में नगर निगम ने सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सोमवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए बीएलडब्ल्यू रोड (ककरमत्ता) स्थित करीब एक बीघा सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त करा लिया। बाजार मूल्य के अनुसार इस भूमि की कीमत लगभग 100 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। नगर निगम ने न्यायालय के आदेश के अनुपालन में राजस्व टीम के साथ मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की और वर्षों से कूड़े से पाट दी गई पोखरी की खुदाई भी शुरू करा दी।
—महापौर की पहल पर हुई प्रभावी कार्रवाई
महापौर अशोक कुमार तिवारी के निर्देश पर नगर निगम ने इस मामले की प्रभावी पैरवी की, जिसके परिणामस्वरूप करीब 38 वर्ष पुराने भूमि विवाद का पटाक्षेप हो गया। कार्रवाई के दौरान सहायक नगर आयुक्त अनिल यादव के नेतृत्व में निगम एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर कब्जा हटवाया और तीन जेसीबी मशीनों की मदद से पोखरी की खुदाई शुरू करा दी।
—1988 से चल रहा था भूमिधरी अधिकार का विवाद
मामला मौजा ककरमत्ता (परगना देहात अमानत) स्थित अराजी संख्या-411 से जुड़ा है। वर्ष 1988 में रामनरायन पुत्र स्वर्गीय गज्जन ने उत्तर प्रदेश सरकार समेत अन्य पक्षकारों के विरुद्ध धारा 229(ख) के तहत भूमिधरी अधिकार का दावा किया था। वादी का कहना था कि उनके पूर्वज वर्ष 1356 एवं 1359 फसली से भूमि पर काबिज रहे हैं, इसलिए उन्हें स्थायी भूमिधर घोषित किया जाए। इस मामले में वर्षों तक अपील और निगरानी याचिकाओं का सिलसिला चलता रहा।
—न्यायालय ने पोखरी को माना सार्वजनिक उपयोग की भूमि
वाद संख्या 1987/2025 की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त उपजिलाधिकारी (सदर) प्रज्ञा सिंह की अदालत ने राजस्व अभिलेखों का गहन परीक्षण किया। न्यायालय ने पाया कि वर्ष 1356 और 1359 फसली के खसरे में संबंधित भूमि के कॉलम-8 में 'सिंघाड़ा' तथा कॉलम-19 में 'पोखरी' दर्ज है।
अदालत ने उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950 की धारा-132 का हवाला देते हुए कहा कि पोखरी और तालाब सार्वजनिक उपयोग की भूमि हैं। ऐसी भूमि पर किसी व्यक्ति को पांच वर्ष से अधिक अवधि का पट्टा नहीं दिया जा सकता और न ही उसे संक्रमणीय भूमिधर घोषित किया जा सकता है। इसके आधार पर न्यायालय ने वादी का दावा खारिज करते हुए अराजी संख्या-411 से सभी निजी खातों के नाम निरस्त करने तथा राजस्व अभिलेखों में भूमि को पुनः 'पोखरी' के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया।
—तीन जेसीबी से शुरू हुई पोखरी की खुदाई
न्यायालय के आदेश के तत्काल अनुपालन में नगर निगम ने कार्रवाई करते हुए उस पोखरी की खुदाई शुरू कराई, जिसे कथित रूप से भू-माफियाओं द्वारा कूड़ा डालकर पाट दिया गया था। मौके पर तीन जेसीबी मशीनें लगाई गईं ताकि पोखरी को उसके मूल स्वरूप में वापस लाया जा सके।
—मूल स्वरूप में विकसित होगी पोखरी
महापौर अशोक कुमार तिवारी ने कहा कि कब्जामुक्त कराई गई इस सरकारी भूमि पर स्थित पोखरी का पुनरुद्धार कर उसका सौंदर्यीकरण कराया जाएगा। पोखरी के पुनर्जीवन से क्षेत्र के भू-जल स्तर में सुधार होगा, जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। नगर निगम का कहना है कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा और सार्वजनिक उपयोग की संपत्तियों को संरक्षित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

