लखीमपुर खीरी के पर्यटन विकास की 7 परियोजनाओं के लिए 483 लाख स्वीकृत

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लखीमपुर खीरी के पर्यटन विकास की 7 परियोजनाओं के लिए 483 लाख स्वीकृत


धार्मिक स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार को भी मिलेगा बढ़ावा-जयवीर सिंह

लखीमपुर खीरी, 20 अप्रैल (हि.स.)। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की ओर से वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य योजना के अंतर्गत लखीमपुर खीरी जिले के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों की पर्यटन विकास की परियोजनाओं के लिए 662.21 लाख रूपये की धनराशि के प्रशासकीय स्वीकृत के सापेक्ष 7 परियोजनाओं के लिए 483 लाख रूपये की धनराशि स्वीकृत की गयी है। इसके लिए यूपीएसटीडीसी कार्यदायी संस्था को नामित किया गया है। कार्यदायी संस्था को निर्देशित किया गया है कि परियोजना के कार्य गुणवत्ता एवं समयबद्धता के साथ पूरा करायें। यह जानकारी सोमवार को सूचना विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी गई है।

जानकारी में बताया गया है कि प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने जनपद लखीमपुर के मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत महाभारत कालीन पाण्डवों द्वारा स्थापित ओछवानाथ शिव मंदिर के पर्यटन विकास एवं सौन्दर्यीकरण के लिए 111 लाख रूपये, निघासन विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत निघासन तहसील के ढखेरवा चौराहे के आगे अंतर्वेद नाम प्राचीन स्थान के पर्यटन विकास के लिए 81 लाख रूपये तथा गोला गोकरन नाथ के चौसन्दे बाबा स्थान के पर्यटन विकास के लिए 96 लाख रूपये की धनराशि स्वीकृत की गयी है।

इसी प्रकार लखीमपुर खीरी के सदर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत अटकोनवा में माता बेलहिया धाम के पर्यटन विकास के लिए 60 लाख रूपये, पलिया विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत सम्पूर्णा नगर में स्थित बालाजी मंदिर के पर्यटन विकास के लिए 20 लाख रूपये, श्रीनगर विकासखण्ड लखीमपुर खीरी के अंतर्गत प्राचीन देवकली तीर्थ मंदिर के पर्यटन विकास के लिए 70 लाख रूपये तथा कस्ता में स्थित बाबा गौरीशंकर बेहजम का पर्यटन विकास के लिए 45 लाख रूपये की धनराशि स्वीकृत की गयी है।

जयवीर सिंह ने बताया कि प्राचीन विरासत से जुड़े पूरे प्रदेश के धार्मिक स्थलों का पर्यटन विकास के अंतर्गत सौन्दर्यीकरण के साथ ही श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधायें सुलभ कराने के लिए परियोजनाएं स्वीकृत की गयी है। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ सांस्कृतिक पुनरोद्धार कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए धार्मिक पर्यटन से श्रद्धालुओं को जोड़ना है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के साधन तथा राज्य सरकार को राजस्व की प्राप्ति भी होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / देवनन्दन श्रीवास्तव

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