उप्र शिक्षक भर्ती मामला: आरक्षण विसंगति के विरोध में अभ्यर्थियों का विधानसभा पर प्रदर्शन
-63 दिनों से ईको गार्डन में धरना, सात दिन से भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों को पुलिस ने बसों से पहुंचाया वापस
लखनऊ, 02 नवंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा-2018 में आरक्षण विसंगति दूर करने और नियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे सैकड़ों अभ्यर्थियों ने सोमवार को विधानसभा के सामने प्रदर्शन किया। पिछले 63 दिनों से ईको गार्डन में धरना दे रहे और सात दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों ने सरकार के खिलाफ आक्रोश जताते हुए संशोधित परिणाम जारी करने और पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थी सड़क पर बैठ गए। पुलिस ने उन्हें जबरन बसों से ईको गार्डन पहुंचा दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि वर्ष 2018 की भर्ती प्रक्रिया में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अभ्यर्थियों को नियमानुसार आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया। इससे बड़ी संख्या में पात्र अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित रह गए। उनका दावा है कि इस मामले में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग और विधान परिषद की सामाजिक न्याय एवं सद्भाव समिति के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत किए गए हैं। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति के आधार पर 150 में 60 अंक यानी 40 प्रतिशत अर्हता के मानक पर ओबीसी अभ्यर्थियों के परिणाम पर पुनर्विचार कर संशोधित सूची जारी करने की मांग की जा रही है।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे तूफान सिंह और आशुतोष वर्मा ने बताया कि 10 सितंबर को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी यह मामला उठाया गया था। बैठक में माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। अभ्यर्थियों को उनकी मांग मुख्यमंत्री के समक्ष रखने और शासन से दिशा-निर्देश प्राप्त होने के बाद अवगत कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ।
तूफान सिंह के मुताबिक, 'दस्तक दो अभियान' के तहत अभ्यर्थियों ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ओमप्रकाश राजभर, डॉ. संजय निषाद, स्वतंत्र देव सिंह, आशीष पटेल और बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह समेत कई मंत्रियों व भाजपा नेताओं को ज्ञापन देकर न्याय की गुहार लगाई, लेकिन नतीजा नहीं निकला।
आशुतोष वर्मा ने कहा कि सात दिनों से भूख हड़ताल कर रहे अभ्यर्थियों की स्थिति बिगड़ रही है, फिर भी सरकार की ओर से पहल नहीं की गई। महिला अभ्यर्थी रंजना जायसवाल ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए अभ्यर्थी कठिन परिस्थितियों में भी न्याय की उम्मीद लेकर धरने पर डटे हैं।
धरना प्रभारी नवीन चौधरी ने कहा कि आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि संवैधानिक और आरक्षण संबंधी अधिकारों के लिए है। अभ्यर्थियों ने आरक्षण विसंगति की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने, संशोधित परिणाम जारी करने और पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि शासन से ठोस लिखित निर्णय मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा

