वाराणसी के सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में 01 नवंबर को मनेगा छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस
—सांस्कृतिक विविधता भारत की आत्मा, राष्ट्रीय एकात्मता उसकी सबसे बड़ी शक्ति: कुलपति
वाराणसी,30 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में आगामी 01 नवंबर को छत्तीसगढ़ राज्य का स्थापना दिवस पूर्ण उत्साह, गरिमा एवं उल्लास के साथ मनाया जाएगा। उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश तथा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा की स्वीकृति पर यह निर्णय लिया गया है। इस अवसर पर विविध शैक्षणिक, बौद्धिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, ऐतिहासिक विरासत, भौगोलिक विशेषताओं एवं विकास यात्रा से परिचित कराना तथा राष्ट्रीय एकात्मता की भावना को सुदृढ़ करना है। शुक्रवार को यह जानकारी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.बिहारी लाल शर्मा ने देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ज्ञान के साथ राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना के संवाहक भी हैं। भारत की वास्तविक शक्ति उसकी सांस्कृतिक विविधता, समृद्ध परंपराओं और राष्ट्रीय एकात्मता में निहित है। देश के विभिन्न राज्यों के स्थापना दिवस मनाना केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि एक-दूसरे की संस्कृति, इतिहास, लोकजीवन और उपलब्धियों को समझने तथा सम्मान देने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक संवेदनशीलता और विविधता के प्रति सम्मान का भाव विकसित करते हैं। विश्वविद्यालयों का दायित्व केवल ज्ञान का प्रसार करना ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को देश की सांस्कृतिक विरासत एवं राष्ट्रीय मूल्यों से आत्मीय रूप से जोड़ना भी है। उन्होंने आयोजन को रचनात्मक, सहभागितापूर्ण एवं प्रभावी बनाने पर बल दिया।
शासन के निर्देशानुसार 31 अक्टूबर से 15 नवंबर, 2026 तक देश के 17 राज्यों के स्थापना दिवस विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में मनाए जाने हैं। इसी क्रम में इस विश्वविद्यालय को छत्तीसगढ़ राज्य के स्थापना दिवस के आयोजन की जिम्मेदारी प्रदान की गई है। कार्यक्रम के अंतर्गत छत्तीसगढ़ की स्थापना से लेकर वर्तमान तक की विकास यात्रा, प्रमुख उपलब्धियों एवं विशिष्टताओं पर आधारित लघु वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री) तैयार कर उसका प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें राज्य की सामाजिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं अन्य विशिष्ट विरासतों का समग्र परिचय प्रस्तुत किया जाएगा। विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ की सामाजिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं वैज्ञानिक विशेषताओं पर भाषण प्रतियोगिता, सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी तथा राज्य की विशिष्टताओं पर आधारित रंगोली प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसके अतिरिक्त राज्य की सांस्कृतिक एवं भौगोलिक विशेषताओं को प्रदर्शित करने के लिए आकर्षक प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जिसमें छात्र-छात्राएं पोस्टर, मॉडल एवं चार्ट के माध्यम से अपनी रचनात्मक प्रतिभा का परिचय देंगे। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, सामाजिक परंपराओं एवं ऐतिहासिक विरासत को अभिव्यक्त करने वाला विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होगा। इसमें विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा नृत्य, गीत, वादन एवं लघु नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा प्रदर्शित की जाएगी।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

