सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज में शिक्षा और संस्कृत में नवाचार पर मंथन
——डिजिटल गुरुकुल, पांडुलिपि संरक्षण और संस्कृत एआई से भारतीय ज्ञान-परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर जोर
वाराणसी, 28 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज के तहत बुधवार को शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता, सुरक्षा और तकनीकी नवाचार जैसे विषयों पर मंथन हुआ। इस दौरान संस्कृत भाषा, शास्त्रीय साहित्य और भारतीय ज्ञान-परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़कर शिक्षा को अधिक सुलभ, सरल और गुणवत्तापूर्ण बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृत विद्या विभाग के प्रो. डॉ. रविशंकर पांडेय ने की। बैठक में डिजिटल गुरुकुल, प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटलीकरण, ज्ञानसेतु और संस्कृत एआई जैसे नवाचारपरक विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग से प्राचीन ज्ञान-संपदा को संरक्षित करने के साथ उसका व्यापक प्रसार किया जा सकता है। इससे विद्यार्थियों को अध्ययन के नए अवसर मिलेंगे और संस्कृत शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
बैठक में प्राचीन संस्कृत पांडुलिपियों के संरक्षण, गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक सामग्री की सहज उपलब्धता और डिजिटल संसाधनों के माध्यम से संस्कृत अध्ययन को सरल बनाने जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठे। वक्ताओं ने तकनीक को भारतीय ज्ञान-परंपरा से जोड़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इससे पारंपरिक ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
शिक्षा के साथ सामाजिक जागरूकता, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता के विकास को भी महत्वपूर्ण बताया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विभिन्न विषयों पर समूह गठित कर नवाचारपरक विचारों पर चर्चा की। इसका उद्देश्य शिक्षकों और विद्यार्थियों के सामूहिक प्रयासों से नए विचारों को व्यावहारिक रूप देना तथा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के साथ भारतीय ज्ञान-परंपरा की समृद्ध विरासत को संरक्षित एवं संवर्धित करना रहा।
कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन शिवानन्द मिश्र ने किया। इस अवसर पर प्रो. डॉ. रविशंकर पांडेय, डॉ. बालेश्वर झा, डॉ. सूर्यभान कुमार, डॉ. मुकेश मेहता, डॉ. अरुण कुमार, डॉ. श्रवण कुमार, डॉ. विशाखानंद बंसोड़ सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

