श्रीमद्भागवत कथा में गूंजा भक्ति का संदेश, परीक्षित चरित्र और कलियुग प्रसंग का हुआ वर्णन

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श्रीमद्भागवत कथा में गूंजा भक्ति का संदेश, परीक्षित चरित्र और कलियुग प्रसंग का हुआ वर्णन


मीरजापुर, 13 जून (हि.स.)। ड्रमंडगंज क्षेत्र के बरबसा गहरवार गांव स्थित आनंद कुटीर आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन शनिवार को श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो गए। कथा व्यास अनिल महाराज ने श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का वर्णन करते हुए भक्तों को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का संदेश दिया।

कथावाचन के दौरान उन्होंने कहा कि महर्षि वेदव्यास ने समस्त वेदों और पुराणों की रचना के उपरांत देवर्षि नारद की प्रेरणा से श्रीमद्भागवत महापुराण की रचना की थी। यह ग्रंथ मानव जीवन को धर्म, ज्ञान और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

अनिल महाराज ने राजा परीक्षित के जन्म, उनके आदर्श शासन और कलियुग के आगमन से जुड़े प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण, कीर्तन और मनन मनुष्य के अंतर्मन को शुद्ध करता है तथा उसे मोक्ष के मार्ग की ओर अग्रसर करता है। कथा के माध्यम से ईश्वर के प्रति श्रद्धा और समर्पण का भाव जागृत होता है, जिससे जीवन में सदाचार और धर्म का विकास होता है।

कथा के बीच-बीच में भजन गायक वंशनारायण शुक्ल द्वारा प्रस्तुत भक्तिमय भजनों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। भजनों और कथा के संगम से पूरा कथा पंडाल आध्यात्मिक वातावरण से गुंजायमान रहा।

इस अवसर पर अधिवक्ता विजय नारायण मिश्र, उमानाथ मिश्र, गौरीशंकर दुबे, राकेश तिवारी, लालजी तिवारी, श्रीधर मिश्र, भानु तिवारी समेत क्षेत्र के गणमान्य नागरिक और सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा

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