मीरजापुरः वन भूमि पर विद्यालय निर्माण, बिना एनओसी काम रोकने का दावा

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मीरजापुरः वन भूमि पर विद्यालय निर्माण, बिना एनओसी काम रोकने का दावा


- वन विभाग ने आराजी संख्या 730 व 732 को अपनी जमीन बताया, लहुरियादह में उच्च प्राथमिक विद्यालय का निर्माण अधर में

मीरजापुर, 05 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मीरजापुर जिले में ड्रमंडगंज क्षेत्र के आदिवासी बाहुल्य लहुरियादह गांव में निर्माणाधीन उच्च प्राथमिक विद्यालय का काम रविवार को वन विभाग ने रुकवा दिया। वन विभाग का स्पष्ट दावा है कि विद्यालय के लिए चुनी गई जमीन उसकी आराजी संख्या 730 और 732 में दर्ज वन भूमि है। विभाग के अनुसार इस जमीन पर विद्यालय निर्माण के लिए उसकी एनओसी नहीं ली गई थी। इसी आधार पर टीम ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य रोक दिया।

ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2023 में गांव में उच्च प्राथमिक विद्यालय खोलने की मांग तत्कालीन जिलाधिकारी दिव्या मित्तल से की गई थी। विद्यालय स्वीकृत होने के बाद भी निर्माण शुरू नहीं हो सका। पूर्व डीएम द्वारा अपने इस्तीफे के बाद वीडियो में लहुरियादह स्कूल का मुद्दा उठाए जाने के बाद जिला प्रशासन ने 30 सितंबर को जमीन चिह्नित कर निर्माण शुरू कराया था।

ग्रामीणों के मुताबिक नींव की खुदाई और निर्माण सामग्री गिराने का काम चल रहा था। रविवार को वन विभाग की टीम पहुंची और जमीन को वन विभाग की बताते हुए काम रुकवा दिया।

वन क्षेत्राधिकारी ड्रमंडगंज रविशंकर शर्मा ने सोमवार को मामले में बताया कि निर्माण स्थल वन विभाग की आराजी संख्या 730 और 732 में आता है। बिना विभागीय अनुमति और एनओसी के वहां निर्माण कराया जा रहा था, इसलिए कार्य रुकवा दिया गया है।

वहीं विद्यालय निर्माण के लिए अधिकृत प्राथमिक विद्यालय लहुरियादह के प्रधानाध्यापक गंगा शंकर ओझा ने कहा कि वन विभाग द्वारा निर्माण रोके जाने की उन्हें जानकारी नहीं है। काम रुकने से विद्यालय निर्माण अधर में लटक गया है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से वन विभाग के दावे और निर्माण की भूमि की स्थिति स्पष्ट कराकर विद्यालय का निर्माण जल्द शुरू कराने की मांग की है।

ग्रामीणों ने कार्रवाई पर उठाए सवाल

राजगीर बद्री प्रसाद ने आरोप लगाया कि रविवार को वन विभाग की टीम ने निर्माण स्थल पर पहुंचकर काम रुकवा दिया और कन्नी, फावड़ा व तगाड़ी आदि सामान उठा ले गई। ग्रामीण हरिलाल ने कहा कि यदि जमीन वन विभाग की थी तो निर्माण शुरू कराने से पहले एनओसी की प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए थी। देवकली ने कहा कि वर्षों की मांग के बाद विद्यालय स्वीकृत हुआ था, लेकिन निर्माण रुकने से ग्रामीणों में निराशा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा

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