याेगी सरकार का ग्रामीण आजीविका मिशन : 12 साल में बदली तस्वीर, सिरोह गांव की महिलाएं बनीं उद्यमी

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याेगी सरकार का ग्रामीण आजीविका मिशन : 12 साल में बदली तस्वीर, सिरोह गांव की महिलाएं बनीं उद्यमी


कानपुर, 06 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की याेगी सरकार के ग्रामीण आजीविका मिशन का जमीनी असर है कि जनपद कानपुर के पतारा ब्लॉक के सिरोह गांव की महिलाएं आज ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत आत्मनिर्भरता की मजबूत मिसाल बन चुकी हैं। दुर्गा महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं बीते 12 वर्षों से मिट्टी से दीये, मटके और देवी-देवताओं की मूर्तियां बनाकर न सिर्फ अपने परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधार रही हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ रही हैं।

स्वयं सहायता समूह से जुड़ने से पहले महिलाएं सीमित संसाधनों के साथ केवल दीये और मटके बनाती थीं। उस समय आमदनी बेहद कम थी और परिवार की आर्थिक हालत भी कमजोर थी। बाद में योगी सरकार की ओर से समूह को आर्थिक सहायता और प्रशिक्षण मिला। इससे महिलाओं ने अपने पारंपरिक हुनर को नया आयाम दिया और मूर्तिकला के क्षेत्र में भी कदम रखा। आज समूह 100 रुपये से लेकर 500 रुपये तक के दीये, मटके और विभिन्न आकार की मूर्तियां तैयार कर रहा है।

सरस आजीविका मेले में दुर्गा महिला स्वयं सहायता समूह के स्टॉल को लोगों की अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। मेले में मूर्तियों, दीयों और मटकों की जमकर बिक्री हो रही है। समूह को एक से डेढ़ लाख तक की कमाई हो जा रही है। साथ ही यहां से महिलाओं को आगे के लिए भी लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं, जिनकी सप्लाई आसपास के जिलों के साथ-साथ दूर-दराज के क्षेत्रों तक की जा रही है।

समूह की सचिव ममता ने मंगलवार को बताया कि पहले हम सिर्फ दीये और मटके बनाकर किसी तरह घर चलाते थे। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद योगी सरकार से आर्थिक मदद और प्रशिक्षण मिला। आज हमारी मूर्तियां और दूसरे उत्पाद दूर-दूर तक जा रहे हैं। घर की हालत सुधरी है और अब हम दूसरी महिलाओं को भी रोजगार दे पा रहे हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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