समाज में समानता, न्याय और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने की जिम्मेदारी प्रदान करती है कानून की शिक्षा : डॉ. अंजू राठी राणा

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समाज में समानता, न्याय और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने की जिम्मेदारी प्रदान करती है कानून की शिक्षा : डॉ. अंजू राठी राणा


वाराणसी, 22 अगस्त (हि. स.)। वाराणसी के सुंदरपुर स्थित आर. एस. बनारस लॉ कालेज में शनिवार को तीसरा दीक्षांत समारोह गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि रही भारत सरकार में विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधि आयोग की सचिव डॉ. अंजू राठी राणा ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि कानून की शिक्षा केवल उपाधि प्राप्त करने तक सीमित नहीं है बल्कि यह समाज में समानता, न्याय और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने की जिम्मेदारी भी प्रदान करती है। आज इस क्षेत्र में न्यायपालिका और अधिवक्ता जैसे पेशेवर के अलावा विद्यार्थियों के लिए कारपोरेट, साइबर कानून, बौद्धिक संपदा अधिकार, वैकल्पिक विवाद समाधान तथा विधिक शोध जैसे क्षेत्रों में संभावनाएं बढ़ी है।

उन्होंने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि आज बदलते विधिक परिदृष्य में तकनीक और नये कानूनों के साथ स्वयं को अपडेट रखना तथा कार्य करना सही मायने में नैतिक और सामाजिक उत्तरदायित्व है।

इससे पहले दीक्षांत समारोह में विधि शिक्षा पूर्ण करने वाले 122 छात्र-छात्राओं को उपाधियां प्रदान कर उनके उज्जवल भविष्य के लिए मार्ग प्रशस्त किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन तथा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ किया गया।

वहीं, इस अवसर पर कॉलेज के संरक्षक व पंजीयन एवं स्टांप शुल्क राज्य मंत्री रवीन्द्र जायसवाल ने समारोह की अध्यक्षता की। मंत्री रवीन्द्र जायसवाल ने कहा कि विधि के विद्यार्थी देश के लोकतांत्रिक एवं न्यायायिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ होते हैं। इनकी भूमिका ऐसे क्षेत्र में होती है, जहां सिर्फ विवादों का समाधान नहीं होता है बल्कि संवैधानिक मूल्यों की रक्षा सुनिश्चित होती है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का उपयोग समाज के कमजोर वर्ग तक न्याय की पहुंच बढ़ाने के लिए होना चाहिए, जिससे जनहित के कार्यो में सहयोग के साथ राष्ट्रीय ताकतों को मजबूती मिलेगी। विधि शिक्षा से जुड़े हर विद्यार्थी के कंधे पर निष्पक्ष और प्रभावी न्यायिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होती है। इसलिए न्यायापालिका की सुचिता बनाये रखने के लिए कभी अपने पेशे के साथ समझौता नहीं करें। इस संकल्प के साथ ही भविष्य की योजनाएं बनाये और राष्ट्र के प्रहरी बनें।

इस अवसर पर प्रबंधक अंजू जायसवाल, डॉ. नलिनी मिश्रा, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रो. सी.पी. उपाध्याय सहित विधि क्षेत्र से जुड़े अन्य वरिष्ठ शिक्षाविद न्यायायिक अधिकारी, अधिवक्ता, कालेज के प्राध्यापक तथा विद्यार्थियों की उपस्थिति रही।

हिन्दुस्थान समाचार / शरद

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