हनुमान-राम मिलन प्रसंग सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु, जयकारों से गूंजा कथा पंडाल

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हनुमान-राम मिलन प्रसंग सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु, जयकारों से गूंजा कथा पंडाल


मीरजापुर, 08 जून (हि.स.)। हलिया क्षेत्र के गड़बड़ा शीतला धाम में आयोजित शतचंडी महायज्ञ एवं संगीतमय रामकथा के छठवें दिन सोमवार को भक्तिभाव का अनूठा वातावरण देखने को मिला। परशुराम अखाड़ा प्रयागराज के तत्वावधान में चल रही कथा में यज्ञाचार्य धीरज द्विवेदी महाराज ने रामायण के हनुमान-राम मिलन और सुग्रीव प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

कथावाचक ने बताया कि माता सीता की खोज में वन-वन भटकते हुए भगवान राम और लक्ष्मण ऋष्यमूक पर्वत पहुंचे। वहां सुग्रीव ने उनकी पहचान जानने के लिए हनुमान जी को ब्राह्मण वेश में भेजा। हनुमान ने प्रभु के चरणों में नमन कर उनका परिचय पूछा। जैसे ही उन्हें भगवान राम के स्वरूप का बोध हुआ, वे अपने वास्तविक रूप में प्रकट हो गए और प्रभु के चरणों में समर्पित हो गए।

स्वामी धीरज द्विवेदी ने कहा कि यह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के दिव्य मिलन का प्रसंग है। उन्होंने कहा कि सच्चा सेवक वही होता है, जो बिना कहे अपने स्वामी के मन का भाव और पीड़ा समझ ले। हनुमान जी की भक्ति और समर्पण आज भी मानव जीवन के लिए प्रेरणा है।

उन्होंने सुग्रीव प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि मित्रता निभाना सबसे बड़ा धर्म है। वचन देकर उसे भूल जाना पाप के समान है। जीवन में विश्वास, निष्ठा और कर्तव्यपालन का विशेष महत्व है।

कथा के दौरान पूरा पंडाल “जय श्रीराम” और “जय हनुमान” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालु कथा श्रवण कर भक्ति रस में डूबे रहे।

इस अवसर पर महेंद्र बाबा, पूर्व प्रधान शिव गरुड़ तिवारी, पूर्व मंडल अध्यक्ष ज्ञानेश्वर दूबे, दिनेश तिवारी, मंगलधारी मिश्र, रविशंकर तिवारी सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा

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