सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और हिंदू राष्ट्र के प्रखर समर्थक थे माधव सदाशिव राव गोलवलकर : नरेंद्र सिंह गौर
प्रयागराज, 19 फ़रवरी (हि.स.)। माधव सदाशिव राव गोलवलकर (श्री गुरुजी), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दूसरे सरसंघचालक रहे , जाे सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और हिंदू राष्ट्र के प्रखर समर्थक थे। उनके अनुसार, भारत एक हिंदू राष्ट्र है, जहाँ हिंदू धर्म व संस्कृति ही राष्ट्रीय पहचान है। यह बातें गुरुवार को प्रयागराज के प्रयाग दक्षिण केशव नगर के लेडीस पार्क में छत्रपति शिवाजी एवं गोलवलकर के जयंती पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रमुख वक्ता पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री नरेंद्र सिंह गौर ने कही।
उन्होंने कहा कि गुरूजी ने जातिवाद से मुक्त, अखंड भारत और हिंदू समाज के संगठन, संघ कार्य पर ज़ोर दिया।
हिंदू राष्ट्र की अवधारणा: वे मानते थे कि भारत में रहने वाले सभी लोगों को हिंदू संस्कृति और भाषा को अपनाना होगा और स्वतंत्र अस्तित्व त्यागकर हिंदू राष्ट्र में विलीन होना होगा।
उनके लिए हिंदुत्व केवल एक धर्म नहीं, बल्कि जीवनशैली और भारतीय राष्ट्र की मूल पहचान थी। उन्होंने राष्ट्र निर्माण के लिए हिंदू समाज की एकता को अनिवार्य माना। अपनी पुस्तक बंच ऑफ थॉट्स (विचार नवनीत) में, उन्होंने मुसलमानों, ईसाइयों और कम्युनिस्टों को आंतरिक खतरे के रूप में वर्णित किया, वे देश की संस्कृति के प्रति निष्ठा नहीं रखते।
उन्होंने हिंदू समाज को संगठित करने के लिए संघ की शाखाओं का विस्तार किया और शिक्षा, सेवा व सामाजिक सुधारों के माध्यम से राष्ट्रवाद की भावना जगाई। वे भौगोलिक और सांस्कृतिक अखंडता के समर्थक थे, जो भारत की प्राचीन परंपरा और संस्कृति को पुनः प्रतिष्ठित करना चाहते थे।
पूर्वांचल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति राजा राम ने कहा उनके आलोचक उन पर हिंदू वर्चस्ववाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हैं, जबकि समर्थक उन्हें एक महान राष्ट्रऋषि और संगठनकर्ता के रूप में देखते हैं।
सह संघ चालक मिल्कियत सिंह बाजवा ने गुरु जी का जीवन परिचय बताया कि उनका जन्म 19 फरवरी 1906, रामटेक महाराष्ट्र में हुआ था, उनकी शिक्षा विज्ञान में स्नातक और स्नातकोत्तर (एम एस सी) के साथ कानून की डिग्री। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में अध्यापन किया, जहाँ 'गुरूजी' नाम पड़ा। उनका संघ से जुड़ाव डॉ. हेडगेवार के प्रभाव में आने से जुड़े और 1941 में सरसंघचालक बने।
उन्होंने हिंदुत्व को एक प्रमुख विचारधारा के रूप में स्थापित किया। उनके विचारों में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद प्रमुख था।
उन्होंने संघ के नेटवर्क को देश भर में मजबूत किया, कई अनुषंगी संगठन शुरू किए और गांधीजी की हत्या के बाद लगे प्रतिबंध से संघ को उबारा। उनका निधन: 5 जून 1973 को हो गया।
प्रांत कार्यकारिणी सदस्य नागेंद्र जायसवाल ने कहा जिन्हें 'गुरूजी' के नाम से जाना जाता है, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दूसरे और सबसे लंबे समय तक (1940-1973) सेवा करने वाले सरसंघचालक थे। एक शिक्षक से विचारक बने गोलवलकर ने संघ को देश भर में फैलाया और हिंदू राष्ट्र की विचारधारा को सुदृढ़ किया।
विभाग घुमंतू प्रमुख अमित ने कहा छत्रपति शिवाजी महाराज मराठा साम्राज्य के संस्थापक और एक वीर योद्धा थे, जिनका जन्म शिवनेरी किले में हुआ था। उन्होंने मुगलों और आदिलशाही के खिलाफ संघर्ष कर हिंदवी स्वराज्य की स्थापना की, विशेषकर 'गनीमी कावा' (छापामार युद्ध) रणनीति अपनाकर। 1674 में रायगढ़ में राज्याभिषेक के बाद वे छत्रपति बने।|
केशव नगर संघचालक राजेंद्र ने कहा शाहजी भोंसले और जीजाबाई के पुत्र, शिवाजी ने बहुत कम उम्र में युद्ध नीति और प्रशासन सीखा।
मात्र 16 वर्ष की आयु में उन्होंने पहला किला (तोरणा) जीता और पुणे पर अधिकार किया। उन्होंने न केवल गोरिल्ला युद्ध में महारत हासिल की, बल्कि भारत की पहली स्वतंत्र नौसेना की नींव भी रखी। उन्होंने 'अष्टप्रधान मंडल' के माध्यम से कुशल शासन व्यवस्था स्थापित की और अपनी प्रजा के प्रति कर्तव्यनिष्ठा के लिए जाने जाते थे। वे हिंदू धर्म के रक्षक थे, लेकिन अपनी सेना में मुसलमानों को भी उच्च पद देते थे।
कार्यक्रम का संचालन सतीश भाग बौद्धिक प्रमुख प्रयाग दक्षिण ने किया । छत्रपति शिवाजी की वीरता पर गीत संजय ने और गुरुजी पर गीत राम प्रकाश ने प्रस्तुत किया। सुशील ने भी सुंदर गीत प्रस्तुत किया । कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख लोगों में नगर कार्यवाह अविनाश , सतीश , अमित ,रमाकांत, रामप्रकाश, संजय, त्रिलोकी, लक्ष्मीकांत,मदन, गिरीश, अनिल,सुशील, रामलाल गर्ग, विकास ,नागेंद्र, रघुराज, रविंद्र,अनूप,दीनानाथ, रविकिशन, सुशील आदि उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल

