प्रयागराज: नदियों के कायाकल्प और बाढ़ समाधान को लेकर नीदरलैंड्स के साथ रणनीतिक साझेदारी

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प्रयागराज: नदियों के कायाकल्प और बाढ़ समाधान को लेकर नीदरलैंड्स के साथ रणनीतिक साझेदारी


प्रयागराज, 20 मार्च (हि.स.)। शहर की जल निकासी और बाढ़ की पुरानी समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में प्रयागराज प्रशासन ने ‘नदी-केंद्रित’ शहरी नियोजन मॉडल अपनाने की दिशा में अहम पहल की है। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित दो दिवसीय ‘वॉटर ऐज़ सीवरेज’ कार्यशाला का समापन शुक्रवार को हुआ।

इस कार्यशाला में नीदरलैंड्स के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और राष्ट्रीय स्तर के हितधारकों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य शहर की जल संबंधी चुनौतियों को सतत विकास के अवसरों में बदलना और प्रस्तावित ‘शहरी नदी प्रबंधन योजना’ (यूआरएमपी) को धरातल पर उतारना रहा।

कार्यशाला के दौरान शहर की आंतरिक नदियों और जलमार्गों की स्थिति पर विस्तृत मंथन किया गया। कालिंदीपुरम नाले को ‘हरित और स्वच्छ’ गलियारे के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया। डच विशेषज्ञों ने ‘प्रकृति आधारित समाधान’ के तहत गंदे पानी और वर्षा जल के लिए अलग-अलग प्रवाह वाली ‘दोहरी प्रणाली’ अपनाने का सुझाव दिया, जिससे जल निकासी व्यवस्था सुदृढ़ होने के साथ स्वच्छता में भी सुधार होगा।

आगामी कुंभ मेला 2031 को ध्यान में रखते हुए यमुना तट के विकास का रोडमैप भी प्रस्तुत किया गया। प्रस्तावित योजना में पारिस्थितिक पार्क और प्रदर्शनी घाट विकसित करने की बात कही गई, जिससे जैव विविधता के संरक्षण के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।

प्राथमिकता में ससुर खदेरी नदी पुनरुद्धार

ससुर खदेरी नदी के पुनरुद्धार को भी प्राथमिकता में रखा गया। वर्तमान में यह नदी अतिक्रमण, अनियोजित निर्माण और कचरे के कारण प्रदूषित नाले में तब्दील हो चुकी है, जिससे मानसून के दौरान जलभराव की समस्या उत्पन्न होती है। विशेषज्ञों ने अतिक्रमण हटाने, नदी की धारा पुनर्जीवित करने और इसे शहर के मुख्य जल निकासी तंत्र से जोड़ने के सुझाव दिए।

इस पहल के तहत डच कार्यक्रम प्रयागराज के लिए चिन्हित दो प्रमुख परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने में तकनीकी सहयोग करेगा। साथ ही शहरी संरचना, गाद प्रबंधन और अपशिष्ट प्रबंधन जैसी स्थानीय चुनौतियों पर भी कार्य किया जाएगा।

मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने कहा कि समस्याओं की पहचान हो चुकी है और अब समयबद्ध क्रियान्वयन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जल प्रबंधन में नीदरलैंड्स का अनुभव प्रयागराज के लिए मार्गदर्शक साबित होगा। नगर आयुक्त साई तेजा ने नदियों के पारिस्थितिक संतुलन को बहाल करने को शहर के भविष्य के लिए अनिवार्य बताया।

विश्व जल दिवस (22 मार्च) से पूर्व आयोजित इस बैठक में “जल और महिला नेतृत्व” विषय पर भी चर्चा हुई, जिसमें जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में महिलाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया। यह कार्यशाला राज्य स्वच्छ गंगा मिशन-उत्तर प्रदेश और नीदरलैंड सरकार के सहयोग से आयोजित की गई, जिसमें नीदरलैंड्स के जल आयुक्त सैंडर कारपाई, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के उप महानिदेशक नलिन श्रीवास्तव, संयुक्त राष्ट्र पर्यावास (यूएन-हैबिटेट) एवं नीदरलैंड दूतावास के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल

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