हर माह अंतिम शनिवार-रविवार को होगा मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण : डॉ. वीरेंद्र सिंह

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हर माह अंतिम शनिवार-रविवार को होगा मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण : डॉ. वीरेंद्र सिंह


हर माह अंतिम शनिवार-रविवार को होगा मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण : डॉ. वीरेंद्र सिंह


नवंबर से फरवरी तक मशरूम उत्पादन एवं प्रसंस्करण पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित होंगे

प्रयागराज, 08 अक्टूबर (हि.स.)।

मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने और अधिक से अधिक लोगों को इसकी तकनीक से जोड़ने के लिए आगामी नवंबर, दिसंबर, जनवरी और फरवरी में हर माह दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रत्येक माह के अंतिम शनिवार और रविवार को प्रशिक्षण कराने की तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे नौकरीपेशा और प्रयागराज से बाहर रहने वाले लोगों को भी अवकाश के दौरान मशरूम उत्पादन की जानकारी मिल सकेगी। यह बात गुरुवार को उद्यान विभाग उत्तर प्रदेश के संयुक्त निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह ने औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र, खुसरोबाग में आयोजित दो दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण के समापन अवसर पर कही।

औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र खुसरोबाग में चल रहे दो दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम का गुरुवार को समापन हुआ। समापन से पहले शुभ सेवा संस्था फाउंडेशन, लखनऊ के सीईओ डॉ. एसआर बघेल ने प्रतिभागियों को बटन और मिल्की मशरूम के उत्पादन की तकनीकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मशरूम एक प्रकार की फफूंद से प्राप्त होने वाला खाद्य पदार्थ है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।

डॉ. बघेल ने मशरूम में होने वाले रोगों और उनके नियंत्रण की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि उत्पादन के दौरान ग्रीन और ब्लैक मोल्ड विकसित होने पर फॉर्मलीन अथवा नमक के घोल का छिड़काव कर रोग को नियंत्रित किया जा सकता है।

इशा मशरूम की ओर से प्रतिभागियों को मशरूम की बिजाई की तकनीक का प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया गया। बताया गया कि मशरूम की बुवाई के समय भूसे में 55 से 60 प्रतिशत तक नमी होना आवश्यक है। अच्छे उत्पादन के लिए वातावरण में करीब 90 प्रतिशत आर्द्रता बनाए रखना भी जरूरी है।

औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र के प्रभारी प्रशिक्षण वीके सिंह, उद्यान निरीक्षक मनीष कुमार, विवेक श्रीवास्तव और अमित सिंह ने भी प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन से संबंधित तकनीकी जानकारी दी।

प्रशिक्षण के अंत में प्रतिभागियों की परीक्षा लेकर उनके ज्ञान का मूल्यांकन किया गया। सफल प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र के साथ मशरूम उत्पादन में उपयोग होने वाले उपकरण भी प्रदान किए गए। डॉ. वीरेंद्र सिंह ने प्रशिक्षण प्रभारी को आगामी चार महीनों के कार्यक्रमों की तैयारी समय से करने के निर्देश दिए।

हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल

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