भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय एकता ही हमारी पहचान, इसे बांटने वाली शक्तियों से रहें सतर्क : केशव प्रसाद मौर्य
दिव्यांग समागम एवं संस्कृति महोत्सव में मुख्य वक्ता मनोज ने सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर दिया जोर न्यायमूर्ति पीके गिरि बोले- दिव्यांगजन राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण शक्ति
प्रयागराज, 01 नवंबर (हि.स.)। भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विरासत हमारी पहचान और सामाजिक एकता का आधार हैं। देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को कमजोर करने और समाज को बांटने का प्रयास करने वाली शक्तियों से सतर्क रहने की जरूरत है। यह बातें वरिष्ठ प्रचारक एवं कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मनोज ने रविवार को उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र परिसर में आयोजित दिव्यांग समागम एवं संस्कृति महोत्सव में कहीं। उन्होंने भारतीय संस्कृति की परंपराओं और उनके संरक्षण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज एवं समदृष्टि, क्षमता विकास एवं अनुसंधान मंडल (सक्षम), काशी प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना के अंतर्गत आयोजित महोत्सव में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए दिव्यांग कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में न्यायमूर्ति पीके गिरि, उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य सहित अनेक अतिथि उपस्थित रहे।
उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति पीके गिरि ने कहा कि दिव्यांगजन अपनी प्रतिभा, परिश्रम, संकल्प और सकारात्मक सोच के बल पर राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उनकी क्षमताओं को पहचानना, उन्हें सम्मानजनक अवसर देना और समाज की मुख्यधारा में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना सभी का नैतिक दायित्व है। उन्होंने कर्तव्यबोध, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
वरिष्ठ पत्रकार धनंजय चोपड़ा ने मीडिया की भूमिका और सामाजिक संवेदनशीलता पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में मानवीय संवेदनाएं कमजोर हो रही हैं। मीडिया को दिव्यांगता को किसी असामान्य स्थिति के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय मानवीय विविधता के स्वाभाविक हिस्से के रूप में देखना चाहिए।
महोत्सव के दूसरे सत्र के मुख्य अतिथि उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य ने दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए संचालित सरकारी योजनाओं और सुविधाओं की चर्चा की। उन्होंने दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया सरल करने, आवास योजनाओं का लाभ दिलाने, मासिक भत्ता और विवाह निधि सहित अन्य सरकारी सुविधाओं तक दिव्यांगजनों की आसान पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम के समन्वयक एवं सक्षम काशी प्रांत के अध्यक्ष योगेंद्र वाजपेयी ने कहा कि दिव्यांगता के विषय में समुचित और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाकर काम करने की जरूरत है। कार्यक्रम की अध्यक्षता सक्षम के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कमलाकांत पांडेय ने की। जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. वीके सिंह सहित अनेक विधायक उपस्थित रहे। संत शिरोमणि यमुनापुरी ने सामाजिक समरसता, मानवीय संवेदना और दिव्यांगजनों के प्रति सम्मानपूर्ण व्यवहार का संदेश दिया।
दिव्यांग कलाकारों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
महोत्सव का प्रमुख आकर्षण प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए दिव्यांग कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रहीं। दिव्यांग बालिका गुनगुन ने मधुर शास्त्रीय गायन से श्रोताओं की खूब सराहना बटोरी। नीरज शुक्ल और दीपक पांडेय की जोड़ी ने भावपूर्ण भजनों की प्रस्तुति देकर वातावरण भक्तिमय बना दिया। सपत्नीक आलोक की प्रस्तुति के साथ वाराणसी से आईं दिव्यांग कलाकार बबली विश्वकर्मा और शांति राज ने भी अपनी कला से दर्शकों का मन मोह लिया।
कलाकारों ने अपनी प्रतिभा, साधना और आत्मविश्वास से साबित किया कि कला और रचनात्मकता किसी शारीरिक सीमा की मोहताज नहीं है। उनकी प्रस्तुतियों पर सभागार तालियों से गूंज उठा। इस दौरान दिव्यांग प्रतिभाओं को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन भी किया गया।
कार्यक्रम में सक्षम काशी प्रांत के अध्यक्ष योगेंद्र वाजपेयी ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि सचिव प्रयाग दत्त तिवारी ने संचालन किया। इस अवसर पर राजेश मिश्र, डॉ. मणिशंकर द्विवेदी, दीपांशु शुक्ल, अरविंद मिश्र, धीरज आहूजा, अचिंत्य मिश्र, डॉ. अपराजिता चौधरी, मुकेश शुक्ल, भाजपा मीडिया विभाग के विवेक मिश्रा, घनश्याम पांडेय सहित अनेक गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रबुद्धजन मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल

