लोक कलाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए संकल्पित है डबल इंजन की सरकार : केशव प्रसाद मौर्य
नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने की अनूठी पहल है ‘लोक रंग, माटी के संग’ उत्सव
प्रयागराज, 06 सितंबर (हि.स.)। लोक कलाओं को जीवंत बनाए रखने, उनके संरक्षण और संवर्धन तथा विलुप्त हो रही कलाओं को बचाने के लिए डबल इंजन की सरकार संकल्पित है। लोक कला नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का प्रभावी माध्यम है। यह बातें उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने रविवार को उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी) में आयोजित तीन दिवसीय ‘उत्तर प्रदेश लोक संस्कृति उत्सव’—‘लोक रंग, माटी के संग’ के शुभारंभ अवसर पर कहीं।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक कलाकार अपनी कला और शब्दों के माध्यम से लोगों के मन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। लोक कलाएं हमारी पहचान और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सरकार लोक कलाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए हरसंभव सहयोग करेगी। उन्होंने उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक से करीब पांच हजार दर्शकों की क्षमता वाले ऑडिटोरियम परिसर के निर्माण के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने को कहा। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्यों के लिए सरकार के पास बजट की कमी नहीं है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में कलाकारों और समाज के प्रत्येक वर्ग की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने व्यंजना आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी की संस्थापक मधुरानी शुक्ला सहित संस्था के सदस्यों और लोक कलाकारों को आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने संस्था द्वारा अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की सराहना की।
इससे पूर्व उप मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर उत्सव का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने ‘संगीत सप्तरंग’ पुस्तिका का विमोचन भी किया। उत्सव का आयोजन व्यंजना आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी तथा संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में 6 से 8 सितंबर तक किया जा रहा है।
लोकगीत और लोकनृत्य ने बांधा समां
उत्सव के पहले दिन बच्चों ने लोकगीत और लोकनृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया। व्यंजना आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी के बच्चों ने ‘सोना झरल’, ‘बामन बन गयो कृष्ण मुरारी’ और ‘ऐसे बरखा मां बदरिया धनघोर’ जैसे लोकगीत प्रस्तुत किए। बच्चों ने ‘बरसन लगी बजरिया’ गीत पर लोकनृत्य भी किया।
वृंदावन की प्रसिद्ध गायिका आस्था गोस्वामी ने ब्रज और अवधी लोकधुनों की मनमोहक प्रस्तुति दी। उनके द्वारा प्रस्तुत ‘आनंद घर नाचत है गणपति’ ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद गाजीपुर से आए जीवन राम और उनके साथी कलाकारों ने पारंपरिक धोबिया नृत्य प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं।
प्रतियोगिताओं में प्रतिभाओं ने दिखाई कला
उत्सव के पहले सत्र में विभिन्न लोक कला प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। प्रतिभागियों ने लोकगीत और चित्रकला में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को धनराशि तथा द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त प्रतिभागियों को सोसाइटी की ओर से पुरस्कार प्रदान किए गए।
पूरे दिन चले कार्यक्रम में 400 से अधिक कलाप्रेमी और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। इस अवसर पर मधु शुक्ला, डॉ. मृत्युंजय राव परमार, श्रेयश शुक्ला, शांभवी शुक्ला सहित कला और साहित्य जगत की कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।
बिरहा और कवि सम्मेलन रहेगा आकर्षण
उत्सव के दूसरे दिन, 7 सितंबर को प्रसिद्ध लोकगायक दिनेश यादव अपने साथियों के साथ पारंपरिक बिरहा गायन प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद दिग्गज कवियों का समागम होगा। इसमें डॉ. सरिता शर्मा, डॉ. विनम्र सेन, डॉ. कमलेश राय, समीर शुक्ला और डॉ. श्लेष गौतम अपनी कविताएं प्रस्तुत करेंगे।
आयोजकों ने सभी कला प्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर लोक संस्कृति के इस उत्सव का आनंद लेने की अपील की है।
कार्यक्रम में चायल की विधायक पूजा पाल, अवधेश गुप्ता, अनीता त्रिपाठी, यमुनापार अध्यक्ष राजेश शुक्ला सहित बड़ी संख्या में लोक कलाकार और कला प्रेमी उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल

