संत रविदास का जीवन समाज को एक सूत्र में पिरोने की देता है प्रेरणा : नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी

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संत रविदास का जीवन समाज को एक सूत्र में पिरोने की देता है प्रेरणा : नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी


शहर दक्षिणी विधानसभा में निकली पावन माटी कलश यात्रा, समरसता और भाईचारे का दिया संदेश

प्रयागराज, 01 अगस्त (हि.स.)। संत शिरोमणि गुरु रविदास का पूरा जीवन समाज में समरसता, भाईचारे और समानता का संदेश देता है। उनके आदर्श आज भी समाज को एक सूत्र में पिरोने और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। यह बातें शनिवार को पावन माटी कलश यात्रा के मौके पर उतर प्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी ने कहीं।

उन्होंने कहा कि पावन माटी कलश यात्रा का उद्देश्य संत रविदास के विचारों और सामाजिक चेतना को जन-जन तक पहुंचाना है।

संत रविदास की 650वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में समरसता संकल्प अभियान के अंतर्गत शनिवार को प्रयागराज की शहर दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र में पावन माटी कलश यात्रा निकाली गई। वाराणसी स्थित गुरु रविदास की जन्मस्थली से लाई गई पवित्र माटी युक्त कलश का मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी और पूर्व महापौर अभिलाषा गुप्ता नन्दी के नेतृत्व में भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान भाजपा पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने श्रद्धापूर्वक यात्रा में भाग लिया।

यात्रा छीतपुर से प्रारंभ होकर बैरहना, नए पुल, इन्दलपुर और सब्जी मंडी होते हुए खरकौनी स्थित कालीचौरा मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर कलश का स्वागत किया और संत रविदास के समरसता, समानता तथा मानवता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर पूर्व महापौर अभिलाषा गुप्ता नन्दी ने कहा कि संत रविदास केवल महान संत ही नहीं, बल्कि सामाजिक समानता और आत्मसम्मान के अग्रदूत थे। उनके विचार आज भी समाज को भेदभाव से ऊपर उठकर एकता और राष्ट्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।

यात्रा में भाजपा महानगर अध्यक्ष संजय गुप्ता, महानगर उपाध्यक्ष अनिल कुमार केसरवानी, आनंद सोनकर, अभियान संयोजक दीप द्विवेदी, विभिन्न मंडलों के अध्यक्ष, पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाने का संदेश दिया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल

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