ओपन-सोर्स तकनीकों से विद्यार्थियों को शोध और कौशल विकास के नए अवसर : डॉ. अमित शर्मा

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ओपन-सोर्स तकनीकों से विद्यार्थियों को शोध और कौशल विकास के नए अवसर : डॉ. अमित शर्मा


आईआईटी बॉम्बे और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के बीच पांच वर्षीय ज्ञान साझेदारी की संभावनाओं पर मंथन

प्रयागराज, 01 अक्टूबर (हि.स.)। ओपन-सोर्स तकनीकों का ज्ञान विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए शिक्षा, शोध तथा तकनीकी कौशल विकास के नए अवसर खोल सकता है। आईआईटी बॉम्बे के विशेषज्ञों के साथ प्रशिक्षण और संवाद से विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग को समझने का अवसर मिला है। यह जानकारी गुरुवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. अमित शर्मा ने दी।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय और आईआईटी बॉम्बे के बीच प्रस्तावित ज्ञान साझेदारी को नियमित प्रशिक्षण, शोध, परियोजना आधारित अध्ययन और इंटर्नशिप से जोड़ने से विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिल सकता है।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन विभाग तथा आईआईटी बॉम्बे के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘यूज ऑफ ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर एंड जियोस्पेशियल नॉलेज’ विषयक दो दिवसीय कार्यशाला का बुधवार को समापन हुआ। कार्यशाला का आयोजन शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के नेशनल मिशन ऑन एजुकेशन थ्रू आईसीटी (एनएमईआईसीटी) के अंतर्गत एफओएसएसईई (फ्री/लिब्रे एंड ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर फॉर एजुकेशन), आईआईटी बॉम्बे के सहयोग से किया गया।

कार्यशाला के दूसरे दिन प्रतिभागियों को विभिन्न ओपन-सोर्स तकनीकों और सॉफ्टवेयर के शैक्षणिक, तकनीकी तथा शोध संबंधी उपयोग की जानकारी दी गई। आईआईटी बॉम्बे के एफओएसएसईई से जुड़े विशेषज्ञों ने अलग-अलग तकनीकी सत्रों में प्रशिक्षण दिया।

सुबह 10 से 10:30 बजे तक एफओएसएसईई के वरिष्ठ परियोजना प्रबंधक राजेश खुशलकर ने ‘ओपन सोर्स हार्डवेयर’ पर जानकारी दी। इसके बाद वरिष्ठ परियोजना प्रबंधक विनीता घावरी और परियोजना प्रबंधक रश्मि पाटणकर ने ‘साइ-लैब’ पर प्रशिक्षण दिया। सहायक परियोजना प्रबंधक सुमंतो कर ने ‘ई-सिम’ और सहायक परियोजना प्रबंधक नलिना वेंकटरमणि ने ‘पाइथन’ के बारे में प्रतिभागियों को जानकारी दी।

तकनीकी सत्रों के बाद भूगोल तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन विभाग के शिक्षकों के साथ अलग-अलग विचार-मंथन सत्र आयोजित किए गए। एफओएसएसईई के राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. मोहम्मद कासिम खान एम. के साथ आईआईटी बॉम्बे और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के बीच पांच वर्षीय ज्ञान साझेदारी के तहत भविष्य में किए जा सकने वाले शैक्षणिक, प्रशिक्षण, शोध और कौशल विकास कार्यक्रमों पर चर्चा हुई।

बैठक में कार्यशालाओं से आगे बढ़कर विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए नियमित प्रशिक्षण, ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर का अभ्यास, परियोजना आधारित अध्ययन, तकनीकी कौशल विकास और इंटर्नशिप के अवसर उपलब्ध कराने पर विचार किया गया। दोनों विभागों के शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए भविष्य में सहयोग के संभावित क्षेत्रों की भी पहचान की गई।

कार्यशाला में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता की। आईआईटी बॉम्बे के विशेषज्ञों के साथ संवाद के दौरान प्रतिभागियों ने तकनीकी विषयों से जुड़े प्रश्न पूछे और अपने विचार साझा किए।

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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल

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