नए विचार को सफल और टिकाऊ उद्यम में बदलने के लिए सुव्यवस्थित बिजनेस प्लान जरूरी : डॉ. शेफाली नंदन
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में ‘विचार से उद्यम तक’ विषय पर सत्र आयोजित, वित्तीय नियोजन और स्टार्टअप की व्यवहार्यता पर हुई चर्चा
प्रयागराज, 13 अक्टूबर (हि.स.)। किसी नए विचार को सफल और टिकाऊ उद्यम में बदलने के लिए सुव्यवस्थित बिजनेस प्लान और मजबूत वित्तीय नियोजन जरूरी है। भावी उद्यमियों को अपने विचार की व्यवहार्यता, शुरुआती लागत और धन जुटाने के स्रोतों का आकलन करके आगे बढ़ना चाहिए। यह बातें इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इन्क्यूबेशन सेंटर की समन्वयक डॉ. शेफाली नंदन ने कहीं। वह विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के सहयोग से आयोजित ‘विचार से उद्यम तक: एक प्रभावी बिजनेस प्लान का विकास’ विषयक सत्र को संबोधित कर रही थीं।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इन्क्यूबेशन सेंटर की ओर से ‘कैम्पस टू स्टार्टअप’ कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित यह सत्र कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव के संरक्षण में हुआ। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में उद्यमशीलता की सोच विकसित करना और अकादमिक ज्ञान को व्यावहारिक जानकारी से जोड़कर विश्वविद्यालय के स्टार्टअप तंत्र को मजबूत बनाना था। सत्र में विद्यार्थियों और स्टार्टअप से जुड़े लोगों को नए उद्यम की शुरुआत से संबंधित आवश्यक जानकारियां दी गईं।
डॉ. शेफाली नंदन ने इन्क्यूबेशन सेंटर की ओर से भावी उद्यमियों और स्टार्टअप को उपलब्ध कराए जा रहे सहयोग के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यावसायिक विचार को सफल उद्यम बनाने के लिए स्पष्ट योजना और उसके प्रमुख घटकों की समझ आवश्यक है। सुव्यवस्थित बिजनेस प्लान से उद्यम की दिशा तय करने और उसे लंबे समय तक सफल बनाए रखने में मदद मिलती है।
वित्तीय नियोजन की भूमिका पर चर्चा
डॉ. अर्चना सिंह ने वित्तीय नियोजन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्टार्टअप शुरू करने में आने वाली शुरुआती लागत का अनुमान लगाने, वित्तीय जरूरतों का आकलन करने और धन जुटाने के विभिन्न स्रोतों की पहचान करने के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मजबूत वित्तीय योजना किसी उद्यम की व्यवहार्यता और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. चेरिटा ने किया। उन्होंने धन्यवाद ज्ञापन भी प्रस्तुत किया। इस अवसर पर डॉ. पंकज त्रिपाठी और डॉ. एकता वर्मा मौजूद रहे।
सत्र में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। संवादात्मक चर्चा के माध्यम से उन्हें अपने विचारों को व्यावहारिक व्यावसायिक योजनाओं में बदलने, उद्यमशील दृष्टिकोण विकसित करने और स्टार्टअप की संभावनाओं को समझने का अवसर मिला।
हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल

