जैविक शोध में कच्चे आंकड़ों का विश्लेषण नई संभावनाओं का आधार : पीयूष तिवारी
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में मल्टी-ओमिक्स पर तीन दिवसीय कार्यशाला संपन्न, विद्यार्थियों और शोधार्थियों को मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण
प्रयागराज, 10 अक्टूबर (हि.स.)। आधुनिक जैविक विज्ञान में केवल प्रयोग करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनसे प्राप्त आंकड़ों का सही विश्लेषण कर उपयोगी निष्कर्ष निकालना भी जरूरी है। मेटाजीनोमिक्स और मेटाबोलोमिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों से जैविक शोध को नई दिशा मिल रही है। इन तकनीकों के माध्यम से संभावित दवाओं की पहचान, उनके गुणों की जांच और विषाक्तता का आकलन करने में मदद मिलती है। यह बातें शनिवार को सेंटाइल बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं अनुसंधान एवं विकास प्रमुख पीयूष तिवारी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला के दौरान कहीं।
विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग की ओर से कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव के संरक्षण में आयोजित ‘एक्सप्लोरिंग मल्टी-ओमिक्स : मेटाजीनोमिक्स, मेटाबोलोमिक्स एंड देयर डेटा एनालिसिस’ विषयक कार्यशाला शनिवार को संपन्न हुई। आठ से 10 अक्टूबर तक चली इस कार्यशाला में विद्यार्थियों और शोधार्थियों को आधुनिक जैविक विज्ञान की तकनीकों, आंकड़ों के विश्लेषण और उद्योगों में उनके व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी गई।
सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण
कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ प्रयोगशाला और उद्योगों में उपयोग होने वाली तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव देना था। इसके लिए सेंटाइल बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड के विशेषज्ञों ने तकनीकी सत्रों का संचालन किया। विशेषज्ञों ने बताया कि प्रयोगों से प्राप्त कच्चे आंकड़ों का व्यवस्थित विश्लेषण करके महत्वपूर्ण जैविक जानकारियां प्राप्त की जा सकती हैं। इससे शोध की गुणवत्ता बढ़ाने और नई दवाओं की खोज की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
कार्यशाला के पहले दिन आठ अक्टूबर को मेटाजीनोमिक्स के सिद्धांतों और उसके उपयोग पर प्रशिक्षण दिया गया। दूसरे और तीसरे दिन, नौ और 10 अक्टूबर को मेटाबोलोमिक्स के व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा हुई। इन सत्रों में संभावित दवा उम्मीदवारों की पहचान, उनके दवा के रूप में उपयोग की उपयुक्तता और विषाक्तता के विश्लेषण से जुड़ी तकनीकों की जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने साझा किए शोध के नए तरीके
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. एस.आई. रिजवी, अनुसंधान एवं विकास के अधिष्ठाता प्रो. मनीष श्रीवास्तव और जैव रसायन विभागाध्यक्ष प्रो. अभय कुमार पांडेय सहित अन्य शिक्षकों ने विचार रखे। जंतु विज्ञान विभागाध्यक्ष एवं कार्यशाला के अध्यक्ष प्रो. कपिंदर ने आयोजन के लिए प्रशासनिक और वित्तीय सहयोग देने पर कुलपति के प्रति आभार जताया। उन्होंने कुलपति को दूसरे कार्यकाल के लिए नियुक्त होने पर बधाई भी दी।
समापन समारोह में प्रशिक्षण पूरा करने वाले प्रतिभागियों और विशेषज्ञों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। प्रो. कपिंदर ने प्रतिभागियों को शोध में आधुनिक तकनीकों के उपयोग के लिए प्रेरित किया। इसके बाद आयोजन समिति की ओर से धन्यवाद ज्ञापन किया गया।
कार्यशाला की आयोजन समिति में डॉ. प्रतीक कुमार संयोजक तथा डॉ. मनीष शर्मा और डॉ. अनुषा सिंह सह-संयोजक रहे। इस अवसर पर जंतु विज्ञान विभाग सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक भी उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल

