भारतीय संस्कृति में आध्यात्मिक चेतना का सशक्त प्रतीक है संगम गंगा आरती : सौम्या अग्रवाल

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भारतीय संस्कृति में आध्यात्मिक चेतना का सशक्त प्रतीक है संगम गंगा आरती : सौम्या अग्रवाल


भारतीय संस्कृति में आध्यात्मिक चेतना का सशक्त प्रतीक है संगम गंगा आरती : सौम्या अग्रवाल


संगम तट पर गंगा आरती में कमिश्नर सौम्या अग्रवाल की गरिमामयी उपस्थिति

प्रयागराज, 20 मार्च (हि.स.)। पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में आयोजित यह आरती भारतीय संस्कृति, एकता और आध्यात्मिक चेतना का सशक्त प्रतीक है। यह बातें शुक्रवार को त्रिवेणी संगम तट स्थित परमार्थ त्रिवेणी पुष्प में आयोजित संगम गंगा आरती के बाद प्रयागराज की कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने कहीं।

उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने और नई पीढ़ी को सनातन मूल्यों के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

श्री वेद विद्यानंदगिरि स्वामी ने अपने संदेश में वेदों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वैदिक परम्पराओं और संस्कारों से जुड़कर ही समाज सुदृढ़ और समृद्ध बन सकता है। उन्होंने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने और उसके संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। संगम तट पर आयोजित यह भव्य गंगा आरती भारतीय सनातन संस्कृति की गौरवशाली परम्परा का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करती है, जो समाज को एकता, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का संदेश दे रही है।

त्रिवेणी संगम तट स्थित परमार्थ त्रिवेणी पुष्प में आयोजित संगम गंगा आरती का दिव्य एवं भव्य आयोजन शुक्रवार को संपन्न हुआ। इस अवसर पर प्रयागराज की कमिश्नर सौम्या अग्रवाल सहपरिवार उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में तेलंगाना के वेद विद्यापीठ बासर से पधारे श्री वेद विद्यानंदगिरि स्वामी (वेदा स्वामी) का विशेष सान्निध्य प्राप्त हुआ। उनके साथ आई ऋषि कन्याओं की उपस्थिति ने आयोजन को वैदिक परम्परा और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत कर दिया।

सायंकाल में सूर्यास्त के समय संगम तट पर दीपों की अनुपम छटा बिखर उठी। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर शंखनाद, घंटियों की मधुर ध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। परमार्थ त्रिवेणी पुष्प के ऋषिकुमारों एवं वेद विद्यापीठ की ऋषिकन्याओं ने अनुशासन और श्रद्धा के साथ गंगा आरती संपन्न की, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल

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