गाजीपुर में अब्दुल हमीद की 61वीं शहादत वर्षगांठ पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि, रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने अर्पित किया पुष्पचक्र

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गाजीपुर में अब्दुल हमीद की 61वीं शहादत वर्षगांठ पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि, रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने अर्पित किया पुष्पचक्र


गाजीपुर में अब्दुल हमीद की 61वीं शहादत वर्षगांठ पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि, रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने अर्पित किया पुष्पचक्र


रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने धामूपुर गांव पहुंचकर अर्पित किया पुष्पचक्र, सैन्य अधिकारियों और शहीद के परिजनों ने भी दी श्रद्धांजलि

प्रयागराज, 10 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जनपद में गुरुवार को वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध में सर्वोच्च बलिदान देने वाले 4 ग्रेनेडियर्स के वीर सैनिक कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार (सीक्यूएमएच) अब्दुल हमीद, परमवीर चक्र (मरणोपरांत) की 61वीं शहादत वर्षगांठ पर गाजीपुर के धामूपुर गांव में भावपूर्ण श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया। रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने राष्ट्रनायक अब्दुल हमीद को पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

समारोह में पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश सब एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग, 39 गोरखा ट्रेनिंग सेंटर के कमांडेंट, परमवीर चक्र से सम्मानित मानद कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव (सेवानिवृत्त), वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, सेवारत सैन्यकर्मी, पूर्व सैनिक, नागरिक गणमान्य लोग और शहीद के परिजन मौजूद रहे।

असल उत्तर की लड़ाई में दिखाया अदम्य साहस

गाजीपुर के धामूपुर गांव निवासी सीक्यूएमएच अब्दुल हमीद भारतीय सेना की 4 ग्रेनेडियर्स के वीर सैनिक थे। 10 सितंबर 1965 को खेमकरण क्षेत्र में असल उत्तर की लड़ाई के दौरान पाकिस्तान की सेना ने पैटन टैंकों के साथ बड़ा बख्तरबंद हमला किया था। दुश्मन की भारी गोलाबारी के बीच अब्दुल हमीद ने जीप पर लगी 106 एमएम रिकॉयलेस राइफल के साथ बेहद जोखिमपूर्ण स्थान पर मोर्चा संभाला।

उन्होंने अदम्य साहस और असाधारण युद्ध कौशल का परिचय देते हुए दुश्मन के कई टैंकों को सटीक निशाने से ध्वस्त किया। इससे बख्तरबंद हमले की गति को रोकने में महत्वपूर्ण मदद मिली। अपने मोर्चे पर लगातार हो रही भीषण गोलाबारी के बावजूद वह अंतिम क्षण तक डटे रहे और मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।

अब्दुल हमीद की वीरता, साहस और कर्तव्य के प्रति समर्पण भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा का अमिट उदाहरण है। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों को देशसेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता रहेगा।

उक्त जानकारी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता एवं जनसंपर्क अधिकारी विंग कमांडर देबार्थो धर ने बताया कि परमवीर चक्र (मरणोपरांत) सीक्यूएमएच अब्दुल हमीद की वीरता और सर्वोच्च बलिदान भारतीय सेना की ‘सेवा परमो धर्मः’ तथा ‘स्वयं से पहले सेवा’ की भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है। उनकी शहादत को राष्ट्र सदैव सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद करता रहेगा।

हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल

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