बलिया में 27 मृतक और 250 अपात्र बन गए पीएम आवास के लाभार्थी, डीएम ने दिए रिकवरी के आदेश
-भुगतान करने वाले अधिकारियों के वेतन से रिकवरी करने के आदेश
बलिया, 14 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद बलिया में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में बड़ी गड़बड़ी सामने आयी है। 2016 से 2024 के बीच एक ओर जहां 250 अपात्रों को पीएम आवास का भुगतान कर दिया गया, वहीं 27 मृतक भी लाभार्थी बन गए हैं। जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने अपात्रों काे लाभार्थी बनाने वाले जिम्मेदारों के वेतन से रिकवरी के आदेश दिए गए हैं।
जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से आज बुधवार को यह जानकारी दी गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में इन गड़बड़ियों की जानकारी तब सामने आयी जब जनपद स्तरीय निगरानी समिति की बैठक मंगलवार को हुई। जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए इस लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि जनपद के सभी विकासखंडों में कुल 623 प्रधानमंत्री आवास बनाए जाने का लक्ष्य निर्धारित था। इसमें विकासखंड गड़वार में 62, सोहांव में आठ, रेवती में आठ तथा चिलकहर में चार आवास अब तक पूर्ण नहीं हो सके हैं।
हैरानी तो तब हुई जब बिना सत्यापन के 250 अपात्र व्यक्तियों को प्रधानमंत्री आवास योजना की धनराशि का भुगतान कर दिए जाने की जानकारी डीएम को मिली। डीएम की समीक्षा में यह भी सामने आया कि 27 आवास मृतक व्यक्तियों के नाम पर आवंटित किए गए हैं। वहीं 80 आवास जमीनी विवाद के कारण लंबित हैं तथा 31 आवास न्यायालय में विचाराधीन हैं। 623 पीएम आवासों के सत्यापन करने के दिए आदेश दिए गए हैं। जिस पर जिलाधिकारी ने संबंधित विकासखंड अधिकारियों को निर्देशित किया है कि सभी पेंडिंग आवास मामलों का तत्काल निस्तारण कराया जाए और 623 आवासों का सत्यापन कराने का निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों के हस्ताक्षर से यह भुगतान हुआ है, उनके वेतन से रिकवरी करने का आदेश दिया।
उन्होंने चेतावनी दी कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डीएम ने मनरेगा योजना के अंतर्गत आवास लाभार्थियों को दी जा रही मजदूरी की स्थिति की भी विस्तृत जानकारी ली।
आवास प्लस सर्वे की प्रगति की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जिन व्यक्तियों को सर्वे में पात्र अथवा अपात्र घोषित किया गया है, उसकी जानकारी प्रत्येक ग्राम पंचायत में प्रधान के माध्यम से खुली बैठक कर सार्वजनिक रूप से पढ़कर सुनाई जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि किन कारणों से किसी का नाम आवास सूची से हटाया गया है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / नीतू तिवारी

