मिशन शक्ति केंद्र शिकायत के साथ-साथ संवाद, परामर्श का एकीकृत मंच : पुलिस महानिदेशक
लखनऊ, 16 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में मिशन शक्ति अभियान फेज-5 के अंतर्गत पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने शुक्रवार को बरेली परिक्षेत्र के समस्त बरेली, बदायूँ, पीलीभीत, शाहजहाँपुर जिलों में स्थापित किये गये मिशन शक्ति केन्द्रों के प्रभावी संचालन के लिए जीआईसी ऑडिटोरियम बरेली में आयोजित मिशन शक्ति कौशल कार्यशाला का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शुभारम्भ किया।
कार्यशाला में पुलिस एवं प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के अतिरिक्त, चिकित्सकों, मनोवैज्ञानिकों, काउंसलरों, परिवार परामर्श केन्द्र के प्रभारियों ने भी प्रतिभाग किया। इस अवसर पर डीजीपी ने मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आगामी समय में प्रत्येक मिशन शक्ति केंद्र के लिए न्यूनतम सेवा मानक (मिनिमम सर्विस स्टैंडर्ड) तय किए जाएंगे ताकि प्रदेश के किसी भी थाने में नागरिकों को समान गुणवत्ता की सेवा मिले। मिशन शक्ति केंद्र एक भरोसेमंद “ब्रांड” के रूप में स्थापित हो। प्रशिक्षण, एसओपी के सरलीकरण और संसाधनों की उपलब्धता पर निरंतर कार्य किया जाएगा।
मिशन शक्ति केंद्रों का मूल आधार संवेदनशीलता, धैर्य और सुनने की क्षमता है। पीड़िता से संवाद के प्रारंभिक 10 मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। बिना जजमेंट के सुनना, सम्मानजनक व्यवहार और सहानुभूति अपने आप में समस्या समाधान का सशक्त माध्यम है। जागरूकता और संवाद के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इलोपमेंट, सामाजिक अपराधों में उल्लेखनीय कमी, बलात्कार के मामलों में लगभग 33 फीसदी की गिरावट, दहेज हत्या जैसे सामाजिक अपराधों में लगभग 13 फीसदी की कमी। यह स्पष्ट करता है कि संवाद, संवेदनशीलता और कम्युनिटी आउटरीच पुलिस के अत्यंत प्रभावी उपकरण हैं। अपराधियों के प्रति कठोर दृष्टिकोण आवश्यक है, किंतु पीड़ितों और नागरिकों के लिए मानवीय एवं सहयोगात्मक दृष्टिकोण अनिवार्य है।
पुलिस महानिदेशक ने कहा कि मिशन शक्ति केंद्र महिलाओं एवं पीड़ितों के लिए केवल शिकायत दर्ज करने का माध्यम नहीं, बल्कि संवेदनशील संवाद, परामर्श एवं समन्वित समाधान का प्रभावी मंच बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में वर्ष 2020 में प्रारंभ मिशन शक्ति अभियान को 'संपूर्ण सरकारी दृष्टिकोण' के तहत संचालित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य नागरिकों तक शासन की विभिन्न योजनाओं की जानकारी एवं सेवाएं एकीकृत रूप से पहुंचाना है।
मिशन शक्ति के पाँचवें संस्करण में प्रत्येक थाने पर मिशन शक्ति केंद्र की स्थापना की गई है, जिससे महिला संबंधी समस्याओं का समाधान एफआईआर तक सीमित न रहकर प्री-एफआईआर काउंसलिंग, संवाद, जागरूकता, कानूनी सहायता, मेडिकल रेफरल और पोस्ट-ट्रॉमा केयर तक विस्तारित हो सका है। महिला थानों और जिला स्तर के परामर्श केंद्रों की सीमाओं को ध्यान में रखते हुए इन सभी सेवाओं को एक छत के नीचे समाहित किया गया है।
इन केंद्रों के माध्यम से डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी (डीएलएसए) से समन्वय कर निःशुल्क विधिक सहायता, तथा सरकारी एवं निजी अस्पतालों के साथ तालमेल कर आवश्यक चिकित्सीय सहयोग सुनिश्चित किया गया है। कई गंभीर मामलों में इससे पीड़ितों को नया और सुरक्षित जीवन मिला है।
मिशन शक्ति केंद्रों के लिए वाहनों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक थाने पर चार-चार स्कूटी उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। अंत में पुलिस महानिदेशक ने मिशन शक्ति से जुड़े सभी अधिकारियों, कर्मियों, चिकित्सकों, विधिक विशेषज्ञों एवं सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संवाद, संवेदनशीलता और समन्वय के माध्यम से मिशन शक्ति केंद्र प्रदेश में महिला सुरक्षा एवं सामाजिक विश्वास का सशक्त माध्यम बनकर उभरे हैं।
कार्यशाला में प्रतिभाग करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों एवं विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्ट वक्ताओं ने अनुभव, सुझाव साझा किया। एडीजी जोन बरेली रमित शर्मा, बरेली मंडलायुक्त भूपेन्द्र एस. चौधरी, मंडलायुक्त बरेली ने कार्यशाला को सम्बोधित किया। डीआईजी बरेली अजय कुमार साहनी ने बरेली परिक्षेत्र के मिशन शक्ति से सम्बंधित महत्वपूर्ण केस स्टडीज का उल्लेख किया गया।
महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन की एडीजी पद्मजा चौहान ने हाइब्रिड मोड में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रतिभाग कर मार्गदर्शन दिया। बरेली डीएम अविनाश सिंह ने कार्यशाला को सम्बोधित किया। एसएसपी बरेली अनुराग आर्या ने कार्यशाला में प्रतिभाग करने वाले समस्त अधिकारी एवं कर्मचारियों का अभार और उत्कृष्ट कार्य करने वाली मिशन शक्ति केन्द्र टीम, आंवला परिवार परामर्श केन्द्र के परामर्शदाताओं तथा अतिथि वक्तागणों को कार्यशाला में सम्मानित किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / दीपक

