यूपी में खनिज क्षेत्र की बदल रही तस्वीर, फॉस्फोराइट-लौह अयस्क-चूना पत्थर के खनन की तैयारी

WhatsApp Channel Join Now
यूपी में खनिज क्षेत्र की बदल रही तस्वीर, फॉस्फोराइट-लौह अयस्क-चूना पत्थर के खनन की तैयारी


लखनऊ, 29 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में खनिज क्षेत्र में नए भंडारों की खोज और उनके व्यावसायिक दोहन की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। वर्ष 2022 से अब तक फॉस्फोराइट, लौह अयस्क और चूना पत्थर के कई खनिज ब्लॉकों की खोज के बाद ई-निविदा सह ई-नीलामी के माध्यम से निजी निवेशकों को खनन पट्टे देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। पर्यावरणीय स्वीकृतियां और वन संबंधी अनापत्तियां मिलने के बाद इन खनिजों का प्रदेश में उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। इससे राज्य के राजस्व के साथ-साथ खनिज आधारित उद्योगों और रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

उत्तर प्रदेश की भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की सचिव एवं निदेशक माला श्रीवास्तव ने मंगलवार को बताया कि प्रदेश का अधिकांश हिस्सा इंडो-गैंगेटिक मैदान में स्थित है, जबकि दक्षिणी हिस्से में बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र की पठारी एवं चट्टानी संरचनाएं हैं। इन क्षेत्रों में खंडा, गिट्टी और बोल्डर आदि का खनन लंबे समय से होता रहा है। अब वैज्ञानिक अन्वेषण के माध्यम से प्रदेश में प्रमुख खनिजों के नए भंडार तलाशे जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 से भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई), उत्तरी क्षेत्र लखनऊ तथा मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड (एमईसीएल), नागपुर सहित विभिन्न एजेंसियों ने खनिज अन्वेषण किया। इसके परिणामस्वरूप फॉस्फोराइट, लौह अयस्क और चूना पत्थर के खनिज ब्लॉक चिह्नित किए गए। इन ब्लॉकों के लिए ई-निविदा सह ई-नीलामी के माध्यम से निजी निवेशकों से बोलियां प्राप्त कर खनन पट्टों के लिए आशय पत्र जारी किए गए हैं।

दो फॉस्फोराइट ब्लॉकों को खनन पट्टे के लिए आशय पत्र

अधिकारियों के अनुसार फॉस्फोराइट के दो ब्लॉक ऐसे हैं, जिन्हें कंपोजिट लाइसेंस के लिए ई-निविदा सह ई-नीलामी के जरिए आवंटित किया गया था। संबंधित आवंटी कंपनियों ने अन्वेषण कार्य पूरा कर नियमानुसार खनन पट्टे के लिए आवेदन किया। इसके बाद दोनों को खनन पट्टे के लिए आशय पत्र जारी किए गए हैं। पर्यावरण स्वीकृति और वन अनापत्ति मिलने के बाद इनसे उत्पादन शुरू किया जा सकेगा।

फॉस्फोराइट का उपयोग उर्वरक उद्योग, लौह अयस्क का उपयोग स्टील उद्योग और चूना पत्थर का इस्तेमाल सीमेंट उद्योग समेत विभिन्न क्षेत्रों में होता है। इनके स्थानीय स्तर पर उत्पादन से प्रदेश में खनिज आधारित उद्योगों के लिए कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ने की संभावना है।

लौह अयस्क, ग्लूकोनाइट, दुर्लभ मृदा तत्व और स्वर्ण के ब्लॉक भी प्रक्रिया में

प्रदेश में लौह अयस्क, ग्लूकोनाइट, दुर्लभ मृदा तत्व और स्वर्ण धातु के ब्लॉकों के लिए भी ई-निविदा सह ई-नीलामी के माध्यम से कंपोजिट लाइसेंस के आशय पत्र जारी किए गए हैं। इन आशय पत्र धारकों द्वारा किए जा रहे अन्वेषण कार्य की निगरानी की जा रही है। अन्वेषण पूरा होने के बाद इन क्षेत्रों में भी खनिज उत्पादन की संभावनाएं बढ़ेंगी।

बताया कि प्रदेश में नए खनिज भंडार खोजने के लिए सरकारी और निजी एजेंसियां सक्रिय हैं। मंगलवार को खनन निदेशालय में सचिव, भूतत्व एवं खनिकर्म की अध्यक्षता में राज्य भूवैज्ञानिक कार्यकारिणी परिषद की बैठक हुई। बैठक में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय, एमईसीएल नागपुर, भारतीय खनिज उद्योग महासंघ, लखनऊ विश्वविद्यालय, नियोजन विभाग और भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के अधिकारी शामिल हुए।

बैठक में वर्ष 2025-26 में चल रही अन्वेषण परियोजनाओं की प्रगति और वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित कार्ययोजना पर चर्चा की गई। इसके तहत ललितपुर, झांसी और सोनभद्र में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की 15 परियोजनाएं, झांसी, महोबा और ललितपुर में भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की चार परियोजनाएं, झांसी में एमईसीएल की दो परियोजनाएं तथा सोनभद्र में परमाणु ऊर्जा विभाग की तीन परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं।

अधिकारियों के मुताबिक इन परियोजनाओं में अन्वेषण पूरा होने के बाद प्रदेश में नए मुख्य खनिज ब्लॉक सामने आ सकते हैं। इनका सरकार द्वारा ऑक्शन किए जाने से खनिज आधारित उद्योगों की स्थापना का रास्ता खुल सकता है।

विभाग के अनुसार सरकारी एजेंसियों के अलावा जियो एक्सप्लोर और जियोवेल जैसी निजी कंपनियां भी प्रदेश में खनिज अन्वेषण के लिए आगे आ रही हैं। इससे आने वाले वर्षों में खनिज क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।

हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा

Share this story