कंस वध प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु, अहंकार त्यागने का दिया संदेश
मीरजापुर, 20 जून (हि.स.)। जिगना क्षेत्र के गोसीपुर गांव स्थित हनुमान मंदिर प्रांगण में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन शनिवार को कथावाचक वत्सल महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कंस वध का प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को धर्म, नीति और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
कथावाचन के दौरान उन्होंने बताया कि जब भगवान श्रीकृष्ण कंस के सामने पहुंचे तो कंस ने क्रोधित होकर उनका सामना किया। इस पर श्रीकृष्ण ने उसे शरण में आने और क्षमा प्राप्त करने का अवसर दिया, लेकिन अहंकारवश कंस ने इसे स्वीकार नहीं किया। तब भगवान श्रीकृष्ण ने उसका वध कर अधर्म और अत्याचार का अंत किया।
वत्सल महाराज ने कहा कि अहंकार रूपी कंस आज भी समाज और परिवारों में विभिन्न रूपों में मौजूद है। उन्होंने कहा कि अहंकार का अंत निश्चित है, जबकि विनम्रता और सदाचार ही मनुष्य को सम्मान दिलाते हैं। उन्होंने श्रोताओं से परमार्थ और धर्म के मार्ग पर चलने का आह्वान करते हुए कहा कि ऐसा जीवन ही वास्तव में सार्थक और धन्य होता है।
अपने प्रवचन में उन्होंने एक प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि मिट्टी, लोहा, तांबा और सोना आग में तपकर ही निखरते हैं। उसी प्रकार जीवन की कठिनाइयां व्यक्ति को कमजोर करने के लिए नहीं, बल्कि उसे अधिक मजबूत और बेहतर बनाने के लिए आती हैं। यदि मनुष्य चुनौतियों से घबराकर पीछे हट जाता है तो वह अपनी वास्तविक क्षमता को कभी नहीं पहचान पाता।
कथा के दौरान भक्ति गीतों और संगीतमय प्रस्तुति से श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कार्यक्रम में यजमान राम आसरे, लक्ष्मीशंकर, कृष्ण मुरारी, वेंकटेश, श्लोक शिवार्थ सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर भागवत कथा का रसास्वादन किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा

