ए आई युग बढ़ा रहा है शासन की जिम्मेदारियां : प्रो मनोज दीक्षित

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ए आई युग बढ़ा रहा है शासन की जिम्मेदारियां : प्रो मनोज दीक्षित


ए आई युग बढ़ा रहा है शासन की जिम्मेदारियां : प्रो मनोज दीक्षित


लखनऊ, 16 मार्च (हि.स.)। लखनऊ विश्वविद्यालय के लोक प्रशासन विभाग की अटल सुशासन पीठ द्वारा आयोजित दो दिवसीय आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एवं सुशासन के नए आयाम विषयक संगोष्ठी का शुभारंभ सोमवार को हुआ। मुख्य अतिथि महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलपति प्रो मनोज दीक्षित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो जय प्रकाश सैनी ने की। मुख्य वक्ता प्रो चारु मल्होत्रा, विशिष्ट अतिथि प्रो मनुका खन्ना,पूर्व कुलपति लखनऊ विश्वविद्यालय एवं अनुराग यादव आई ए एस प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश शासन रहे।

संगोष्ठी का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की मूर्ति पर माल्यार्पण के साथ किया गया। कार्यक्रम का आयोजन प्रो नंदलाल भारती विभागाध्यक्ष लोक प्रशासन विभाग के नेतृत्व में किया गया।

मुख्य अतिथि प्रो मनोज दीक्षित ने मानव सभ्यता और तकनीक के गहरे संबंधों पर ध्यान आकृष्ट कराते हुए इस बात को रेखांकित किया कि ए आई के प्रयोग में मुख्य प्रश्न क्या हैं और उनके उत्तर किस प्रकार से ढूंढने होंगे। प्रो दीक्षित ने इस बात पर बल दिया कि किस प्रकार से शासन-प्रशासन को ए आई से एक कदम आगे रहना होगा। साथ ही उन्होंने आपदा प्रबंधन में ए आई के प्रभावी प्रयोग की आवश्यकता के बारे में बताते हुए भारत में ही इन तकनीकों और देशी मॉडल को विकसित करने की बात कही।

मुख्य वक्ता भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, दिल्ली की प्रो चारु मल्होत्रा ने ए आई की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने ए आई के क्रियान्वयन में नीतिगत पक्षों पर चर्चा करते हुए ए आई को अधिक संवेदनशील बनाने की प्रक्रिया पर बात की। उन्होंने सहज ढंग से ए आई के तकनीकी और संवेदनशीलता के पक्षों को जोड़कर समझाते हुए भारतीय दृष्टिकोण से भी ए आई की भूमिका को स्पष्ट किया।

अनुराग यादव आईएएस ने ए आई को प्रशासनिक आयामों से जोड़ते हुए बताया कि किस प्रकार से ए आई को शासन में प्रभावी ढंग से लागू करके सुशासन की अवधारणा को साकार किया जा सकता है। उन्हाेंने इस विषय पर भी चर्चा की गई कि स्टार्टअप और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने में ए आई महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

प्रो मनुका खन्ना ने ए आई के अमानवीय पक्षों पर अपने विचार रखते हुए इसके संभावित खतरों से आगाह किया। उन्हाेंने ए आई को सही और गलत के चश्मे से देखते हुए ही इसका उपयोग करने की बात कही। अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रो जय प्रकाश सैनी द्वारा ए आई के प्रयोग में मानव की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला एवं ए आई के नकारात्मक पक्षों से बचने पर बल दिया। उनके द्वारा सुशासन में ए आई के संवेदना संबंधी पक्षों पर आलोचनात्मक विचार दिए गए।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो जय प्रकाश सैनी द्वारा ए आई के प्रयोग में मानव की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला एवं ए आई के नकारात्मक पक्षों से बचने पर बल दिया। उनके द्वारा सुशासन में ए आई के संवेदना संबंधी पक्षों पर आलोचनात्मक विचार दिए गए। साथ ही प्रो सैनी ने ए आई के माध्यम से सुशासन सुनिश्चित करने में शोधार्थियों द्वारा निभाई जा सकने वाली महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। धन्यवाद ज्ञापन विभाग की आचार्या प्रो वैशाली सक्सेना द्वारा किया गया जबकि कार्यक्रम का संचालन प्रो उत्कर्ष मिश्र, सहायक आचार्य, एमिटी विश्वविद्यालय नोएडा ने किया।

उद्घाटन सत्र के पश्चात 3 तकनीकी सत्रों का भी आयोजन किया गया। इन सत्रों में विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों से यथा डॉ अभिनव शर्मा, डॉ प्रीति चौधरी समेत आए शोधार्थियों द्वारा 40 से अधिक शोध पत्रों को प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर डॉ एस एस चौहान, डॉ नंदिता कौशल, डॉ अविनाश कुमार, डॉ जितेंद्र शुक्ल, ऋचा यादव, एकांश अवस्थी, फैसल अंसारी, कौशांबी, अमित कुमार, गजेंद्र कुमार, अणिमा शुक्ला, राजेश कुमार, विनोद कुमार, पयोध कांत सहित 120 से अधिक विद्यार्थी, शोधार्थी एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे। संगाेष्ठी का समापन 17 मार्च काे हाेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / शिव सिंह

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