जूनागढ़ से सीखा ‘मूंगफली मंत्र’, 32 किसानों का दल लौटा नए संकल्प के साथ

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जूनागढ़ से सीखा ‘मूंगफली मंत्र’, 32 किसानों का दल लौटा नए संकल्प के साथ


मीरजापुर, 21 फ़रवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मीरजापुर जनपद में गंगा का कछार भी है और मैदानी क्षेत्र के साथ पहाड़ी इलाका भी है जो मूंगफली की खेती के लिए उपयुक्त है। इसके बावजूद यहां की अनुकूल हजारों हेक्टेयर भूमि में औसत मूंगफली का उत्पादन 15–16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के आसपास रहता है। इसके वजह से मूंगफली की खेती का रकबा भी घट रहा है, जबकि गुजरात में यही आंकड़ा 35–40 क्विंटल तक प्रति हेक्टेयर रहता है। इसी अंतर को समझने के लिए चुनारगढ़ एफपीओ के 32 सदस्यीय किसान दल ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत संचालित मूंगफली शोध संस्थान जूनागढ़ का अध्ययन दौरा किया।

11 से 19 फरवरी तक चले इस अध्ययन भ्रमण में किसानों ने वैज्ञानिकों के साथ पांच दिन गहन संवाद किया। विशेषज्ञों ने बताया कि कम पैदावार के प्रमुख कारण पुराने बीजों की बार-बार बुवाई, उन्नत प्रजातियों का उपयोग न करना, लाइन से बुवाई व निकाई-गुड़ाई की कमी, बीज व भूमि का शोधन न करना और आधुनिक तकनीकों को न अपनाना है।

वैज्ञानिकों ने उत्तर प्रदेश के लिए विशेष रुप से VG-19535 और गिरनार-4 जैसी उन्नत प्रजातियों की संस्तुति की, जो 35–40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देने में सक्षम हैं। साथ ही यंत्रों से लाइन में बुवाई, बीज शोधन और बुवाई पूर्व खरपतवारनाशी के प्रयोग की सलाह दी गई। किसानों को यह भी बताया गया कि गुजरात में मूंगफली का न्यूनतम समर्थन मूल्य 7,263 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है, फिर भी देश को लगभग 50 प्रतिशत खाद्य तेल आयात करना पड़ता है।

उपनिदेशक कृषि विकास कुमार पटेल के निर्देशन में आयोजित यह यात्रा कृषि विभाग और चुनारगढ़ एफपीओ के संयुक्त प्रयास से संपन्न हुई। दल में मेजर कृपा शंकर सिंह, हरिशंकर सिंह, अशोक सिंह, श्याम सुंदर विश्वकर्मा, सतेंद्र सिंह, राम पोष सिंह, सतीश सिंह समेत 32 किसान शामिल रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा

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