फसल अवशेष प्रबंधन और ग्रामीण उद्यमिता पर किसान कार्यशाला आयोजित
लखीमपुर खीरी, 28 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद लखीमपुर खीरी में पराली जलाने से उत्पन्न पर्यावरणीय और जन-स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए उत्तर प्रदेश के किसान अब सतत फसल अवशेष प्रबंधन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इसी क्रम में जीआईज़ेड-जीपीएस रिन्यूएबल्स परियोजना के अंतर्गत जनपद लखीमपुर खीरी के मितौली ब्लॉक स्थित ग्राम मजगवां में गुरुवार काे एक दिवसीय संवादात्मक किसान प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस जागरूकता पहल का संचालन वर्टिवर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है।
यह पहल जर्मन संघीय आर्थिक सहयोग एवं विकास मंत्रालय (BMZ) द्वारा वित्त पोषित एक बहु-राज्य कार्यक्रम का हिस्सा है, जो भारत में बायोमास आधारित वैकल्पिक ईंधनों के माध्यम से वायु गुणवत्ता में सुधार शीर्षक के तहत उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में चलाया जा रहा है। कार्यशाला में मितौली ब्लॉक के कृषि व स्थानीय अधिकारियों सहित ग्राम प्रधान रामस्वरूप राठौर, किसान, मशीन संचालक और ग्रामीण उद्यमी शामिल हुए।
कार्यशाला के दौरान बताया गया कि भारत में प्रतिवर्ष लगभग 50 करोड़ टन फसल अवशेष उत्पन्न होता है, जिसका बड़ा हिस्सा जागरूकता और संसाधनों के अभाव में जला दिया जाता है। इससे न केवल वायु प्रदूषण होता है, बल्कि मृदा स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। वर्टिवर द्वारा आयोजित इस सत्र में इन-सीटू (खेत में प्रबंधन) और एक्स-सीटू (खेत से बाहर प्रबंधन) दोनों पद्धतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
मैनेजर डॉ. आलोक पटेल ने किसानों को सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, मल्चर और बेलर जैसे आधुनिक उपकरणों की कार्यप्रणाली समझाई। उन्होंने बताया कि इन-सीटू तकनीक से मिट्टी की उर्वरता और जल संरक्षण बढ़ता है, जबकि एक्स-सीटू तकनीक के जरिए पराली का उपयोग चारा, खाद और संपीड़ित जैव गैस (CBG) उत्पादन के लिए करके कमाई की जा सकती है। किसानों ने बेलिंग, भंडारण और बाज़ार संपर्क के माध्यम से ग्रामीण उद्यमिता में विशेष रुचि दिखाई। कार्यक्रम का समापन रामेंद्र कश्यप के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने किसानों से इन तकनीकों को अपनाने की अपील की।
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हिन्दुस्थान समाचार / देवनन्दन श्रीवास्तव

